टोकरी के पीछे की कहानी, आइए जानते हैं बाराबंकी के जलालपुर गांव में

जंगल से लकड़ी काटिके टोकरी बनाउब बाराबंकी जिला के जलालपुर गाँव के मनइन कै पुस्तैनी काम आय।लकिन जंगल कै अंधाधुंध कटाई लोहा अउर प्लास्टिक के सामान कै मांग बढ़ जाय से इनके रोजगार पै काफी असर पड़ा बाय।
विद्यावती बताइन की लगभग पंद्रह साल से हमरे सब टोकरी बनावै कै रोजगार करत हई। यतनी मेहनत कै काम बाय कि सारा हाथ कै चमड़ा एक परत निकुल जाथै। मिट्टी ढ़ोवै, बर्तन रखै अउर जानवर का चारा डाले के काम आवाथै टोकरी लकिन जबसे तसला चलिगा टोकरी कै मांग कम हुवत जात बाय।
रामदास कै कहब बाय की झवाई कै मांग कम हुवय कै सबसे बड़ा कारण जंगल कै कटाई अउर बरसात कै कम हुवब बाय। पहले तौ हिंया कुछ नाय रहा तब हमरे सब मूंज के बाधी कै व्यापार करत रहेन। सन साठ के बहिया मा एक फूल आय रहा उहै जामिगा  तबसे चलत बाय। लकिन अब इहौ सब काटके खेत बनाय लियत अहैं।

रिपोर्टर-नसरीन 

23/11/2017 को प्रकाशित