टी बी दवाओं का स्टाक खत्म

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टी बी की दवा

नई दिल्ली। टी बी की दवाओं का सरकारी स्टाक खत्म होने के कारण आम लोगों और कुछ संस्थाओं ने मिलकर राजधानी के निर्माण भवन के बाहर केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय के खिलाफ 26 जून को धरना प्रदर्षन किया। देष भर में टी बी के मरीज़ों के इलाज में रुकावट हुई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केंद्र स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को नोटिस भेज दिया है।
महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेष, बिहार और नागालैंड राज्यों में केंद्र टी बी विभाग की लापरवाही से लाखों मरीज़ों का इलाज रुका है। अधिकारियों ने प्रदर्षनकारियों को विष्वास दिलाया कि 15 जुलाई तक दवाओं का इंतज़ाम तेज़ी से किया जाएगा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से दो हफ्तों में स्थिति पर जवाब मांगा है।
साल 2011-12 में अकेले भारत में तीन लाख लोग टी बी से मरे। इसके बावजूद साल 2012-13 के लिए टी बी की रोकथाम और इलाज में लगी सरकारी संस्था (राष्ट्रीय टी बी नियंत्रण कार्यक्रम) को स्वास्थ्य के लिए बने बजट का केवल दो प्रतिषत हिस्सा दिया गया।