टी बी के बीमारी फइल हवै

ww12स्वास्थ्य विभाग आंखी मूंदे बइठ रहत हवै। न गावन मा कतौ जाँच होत आय। न मड़इन का कउनौ दवाई मिलत हवै। कउनौ कउनौ गांव मा तौ टी बी जइसे बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी से फैला हवै। पै बिभाग के मड़इन का येहिके बारे मा कुछौ पता नही आय। गरीब मड़ई आपन ईलाज करावे खातिर अस्पताल जात हवै। तौ उनका कुछौ सुबिधा नही मिलै। यहै कारन उनकर या बीमारी झेलत झेलत मउत होई जात हवै। ंगनबाड़ी कहत हें टी बी के मरीजन का जउन डाट्स दवाई दीन जात हवै येहिकर सुबिधा भी गरीब मड़ई का नही मिलै। का फायदा इनतान के सुबिधा का जउन गरीबन तक नही पहुचत। एक कईती सरकार कहत हवै की हर तान के बीमारी का इलाज सरकारी अस्पताल मा मुफ्त होई। मड़ईन के बलगम के जाँच खसरा के जाँच मुफ्त मा होई । पै या सुबिधा गरीबन का नही मिलत हवै। का इनतान  के योजना लिखित रूप माँ बस आवत हवै। सही तरीका से इनका लागू नही कीन जात हवै। सरकार का चाही की स्वास्थ्य विभाग से जवन गावन मा बीमारी फइल हवै। हुआ के मड़इन का मुफ्त इलाज करावे खातिर जाँच करावे अउर समय से मड़इन का इलाज करावे। जेहिसे मड़इन के मौत बीमारी के कारन न हुवे।