टीकमगढ़ जिले के पलेरा ब्लाक के लहार गाँव के आदिवासी विकास से मीलों दूर हैं

जिला टीकमगढ ब्लाक पलेरा, लहार गांव के आदिवासी सरकार की योजना से हें मिलो दूर। एते के आदिवासीयन को नईया कोनउ सुविधा।न एते सड़क,राशन,पानी,स्कूल, स्वस्थकेंद्र हर बात से परेशानी है।इते के आदिवासियन को।एते के आदमी लकडियां बैच के कर रये गुजारो।
एते के रैबे वाले नारायण ओर रामचरन ने बताई के जब हम ओरे छः सात किलो मीटर दूर से लकडिया लेयात तो गिलारे में फंस जाती साइकिले।और कोऊ कोऊ मूड से लेयात तो गिर परत।फिर लकड़ियन को पलेरा बैचबे जात और बई में खर्च चलात।एक दिना में तीस चालीस की बैच लेत।जीसे अपने घर को खर्च चलात।अगर सब्जी लेयात तो रोटी नई बन पात और रोटी बन जात तो सब्जी नई बन पात।एेसे गुजारो कर रये।बच्चन को पेट भर नई खोआ पात न पीया पात।
इते की रैबे बाली गोरा ने बताई के न कुआ हें न हैण्डपम्प हें।दुसरे के कुआ से भरबे जात।तो भरन नई देत
परमलाल भैया लाल ने बताई के एते सत्तर अस्सी बच्चा हें।और खाना केबल दस पन्दरह बच्चन को मिलत। और राशन कार्ड बनवाबे की कओ सो कत के पांच हजार रुपजा देओ।
बताओ हमनो खाबे को तो रुपजा नईया।हम राशन कार्ड के लाने का से ले आय रुपजा।एक स्कूल हें पांच तक सो बरसात में गिलाओ मचो रत सो मासाब पढ़ाबे नई आ पात।और न आगनवाडी वाली दीदी कबहु न पजीरी न खिचड़ी न कछु नई मिलत।न कबहु आशा ए एन एम आती हें।
अगर प्रधान नो जाओ कछु के लाने सो के देत के हओ आज कल जई में घुमात रत मइना भर नो।
प्रधान सुंदर लाल अहिरवार ने बताई के तीन कुआ बनबा दए हें लेकिन बरसात के मारे काम बंद हें।और रोड को काम अक्टूबर से चल हे।अबे बरसात के मारे सब काम बंद हें।
26/07/2016 को प्रकाशित

टीकमगढ़ जिले के पलेरा ब्लाक के लहार गाँव के आदिवासी विकास से मीलों दूर हैं