झांसी जिले के साहिल की कहानी ग्रामीण स्वास्थ्य से जुड़े परेशानियों की एक मिसाल

जिला झांसी, मुहल्ला नौ नंबर उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्तर पे स्वास्थ्य की हालत इतनी ख़राब हे के बीमारी से जान जाबे से पहले चिकित्सा डॉक्टरों दवाइयों के खर्चा के पहले गरीब आदमी तो पहले ही मर जात। एसो ही हो रओ झांसी जिला के नौ नम्बर मुहल्ला में रेबे वाले रजिया वेगम और मुवीन के संगे जिनके बेटा साहिल को बचपन से ही मिर्गी के दौरा परत। आज साहिल बारह साल को हे और बाको हमेशा दर्द सहने परत।जिला झांसी, मुहल्ला नौ नंबर उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्तर पे स्वास्थ्य की हालत इतनी ख़राब हे के बीमारी से जान जाबे से पहले चिकित्सा डॉक्टरों दवाइयों के खर्चा के पहले गरीब आदमी तो पहले ही मर जात। एसो ही हो रओ झांसी जिला के नौ नम्बर मुहल्ला में रेबे वाले रजिया वेगम और मुवीन के संगे जिनके बेटा साहिल को बचपन से ही मिर्गी के दौरा परत। आज साहिल बारह साल को हे और बाको हमेशा दर्द सहने परत। साहिल मरीज ने बताई कबहु सर दर्द होत कबहु पेट दर्द होत। रजिया वेगम साहिल की मताई ने बताई के जब सो जात तो तो एक हाथ टेढो हो जात और मुह में से फसूकर आत तो। अबे भी इतनो इलाज होबे के बाद भी कछू कामयाबी नइ मिली। एक महीना के पच्चीस हजार रुपइया लगत। मुवीन साहिल के बाप ने बताई के अबे तक हमाओ दस लाख रूपइया खर्च हो गओ थोड़ो थोड़ो करके। पत्ती डारत ते बो और जेवर सब बेच दओ इलाज में अब लेवर को काम करत। विजय कुमार शुक्ल मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताई के साहिल को केस पेचीदा हे और जानलेवा हो सकत कोशिश करी जात के दवाई से ठीक करो जा सकत

रिपोर्टर- सफीना

Published on Jul 12, 2017