झांसी जिले के राजापुर में डायरिया से चार की मौत, स्वास्थ्य विभाग बेखबर

जिला झांसी, राजपुर गांव में फेैली डायरिया कि बीमारी। जा बीमारी से चार आदमियन कि मौत भी हो गयी। गांव वालेन को कैैबो हे के सरकारी अस्पताल में न ढंग से इलाज कर रए न जांच जा के मारे आदमी प्राइवेट अस्पतल में दिखाबे जात रिक्शा।
मिथिला ने बताई के हमे मोड़ी अमावस्या कि बीमार हती भोत इलाज करवाओ पन्द्रह हजार रूपईया लग गये और मोड़ी कि मोड़ी चली गयी। सरकारी अस्पताल में ले गये ते सो दो बार छुट्टी कर दई ती के रए ते के हम नई कर सकत जा मरीज को इलाज। और हालत ख़राब हती ज्यादा फिर प्राइवेट में लोआ गये सो ख़त्म हो गयी।
इन्द्रबती ने बताई के हमाय मोड़ा को धीरे धीरे दस दिना होबे जा रए। हम राजापुर गये ते दबाई लेबे सो कछु आराम नई मिलो फिर सरकारी अस्पताल में ले गये। उते से कछु आराम नई मिलो फिर रक्शा लोअया गये प्राइवेट अस्पताल में उते से आराम परो जब ठीक भओ हमाओ मोड़ा। सरकारी अस्पताल में ढंग से दबाई नई देत सो कोऊ नई जात सब प्राइवेट अस्पताल में जात दबाई लेबे।
रीना पाल कि मौत भी डायरिया के मारे भई। रीना राजकीय इन्टर कॉलेज में दस बी कक्षा कि छात्रा हती। रीना कि उम्र अबे केवल सोलह साल हती। रीना के बाप को नाम बब्लू पाल हे। रीना के ख़त्म होबे के मारे रीना कि मताई अब बीमार हो गयी। और हालत भी भोत खराब हे।
रीना कि मताई ने बताई के हमाई मोड़ी को उल्टी दस्त भये सो हम जर्मनी में ले गये। उते दो तीन दिना भर्ती करे रए डॉक्टर और कछु आराम नई परो सो हम मेडिकल में ले गये। सो उते उनने हालई भर्ती करो और बोतले लगाई बस चौबीस घंटा भर्ती रई उते और खत्म हो गयी। हमनो रुपईया भी नई हते तो हमने दूसरे पे उधारी से मांग के ले गये ते। रुपईया तो चाहे जितेक लग जाते लेकिन हमे मोड़ी बच जाती। रुपईया तो हाथ को मेल हे और मजूरी कर लेते सो चुका देते। लेकिन अब हमाई मोड़ी का से आहे। हम तो उसेे गरीब हे सो और सईं।लेकिन हमाई मोड़ी तो बच जाती। हमाई मोड़ी पढबे लिखबे में भोत होशयार हती बा सब काम कर लेत ती। और हमेशा खेल मेहदी प्रतियोगिता में भाग लेत ती और प्रथम आत ती। हमाई जा हालत हो गयी हमाई मोड़ी चली गयी अगर जर्मनी में अच्छे से दबाई देते और जांच करते तो आज हमाई मोड़ी हमाय संगे होती। अब हम कैसे रेहे अपनी मोड़ी के बिना। और अबे भी इतनी बीमारी फैली लेकिन अबे तक न कोई डाक्टर जांच करबे आये न कोई भी नाली में दबाई डारबे न नल में कुआ में कछु में भी नई डारबे आय। अबे तक चार मौते हो गयी। और अबे भी पूरो गांव बीमार हे और सब प्राइवेट अस्पताल में जा रए दबाई लेबे चाहे गरीब होबे चाहे अमीर। लेकिन इलाज कराने तो जानेई हे। अब रुपईया होबे चाहे न होबे सो कर्जा काढ़े हे। लेकिन इलाज तो कराने परे अब चाहे कम लगे चाहे ज्यादा दबाई तो लेने हे।

रिपोर्टर- लाली 

 

18/08/2016 को प्रकाशित