झांसी के खैरार गाँव में मजदूरी के बोझ की वजह से बच्चे नहीं जा रहे स्कूल

जिला झांसी, गांव खैरार शिक्षा ज्ञान कि ज्योति हे और बा पे ग्रहण लग जाये तो कोऊ नई पढ़ सकत। एसी स्थिति झांसी के खैरार गांव कि हे। खैरार के स्कूल में बीस से तीस बच्चा ही स्कूल आ रहे।
मास्टर नारायण देवी ने बताई के हम इते 24 अगस्त को 2013में आय ते। हम जा स्कूल में पढबे के लाने मोटा,खेलार अगल बगल से आत। एते बच्चन कि भोत कम उपस्थिति रत महीना में आठ दिना स्कूल आत। जासे पढाई पे बुरो असर पर रओ। बच्चन से एक दूसरे के फोन नंबर लेके बात करत। एक दुसरे से बुलवात हे बच्चन को एसे चल रओ। और बच्चन को खाना भी मीनू के हिसाब से बनत और अच्छो बनत। सबको पेट भर खाना मिलत और पढ़ाई भी होत। तो भी नई आत बच्चा।
कुसुम ने बताई के बरसात के मारे नई जा पा रए। कितऊ खेती को काम कर रए। लेकिन अब खेती हो किते पा रई पानी के मारे।
सीता ने बताई के हम अपनी मोड़ी अकेली किते पोचा देवे। कछु साधन हे नईया और बरसात हे घाम पर रओ किते अकेली गैल में परेशान हो हे। गेल में कछु भी हो सकत।
रोहित ने बताई के हम आत तो हे स्कूल लेकिन कम आ पात दुकान पे बैठने परत हमे। इते पढ़ाई तो होत लेकिन हम आ नई पात। राहुल ने बताई के हम खेती को काम करत अपने बाप मताई के संगे जासे नई आ पात।कबहु कबहु आत पढ़बे के लाने ।
प्रधान अभय यादव ने बताई के बोर में गंदो पानी जा से आ रओ काय के बरसात के मारे बोर को पाइप टूट गओ अब सई करवा ने हे। और रसोई घर में पानी जाके मारे आत के बाकी छत टूटी हे और जब वा छत बनी ती जब दूसरे प्रधान हते हम तो अबे बने। मैड़म से पतो लग सकत के कोन सी संस्था के अंतर्गत काम करबाओ गओ तो छत को। और अब हमे जानकारी मिल गयी तो अब हम करबा दे।
रिपोर्टर- लाली 
20/08/2016 को प्रकाशित

झांसी के खैरार गाँव में मजदूरी के बोझ की वजह से बच्चे नहीं जा रहे स्कूल