ज्योति सिंह, हम शर्मिंदा हैं आज भी उत्तर प्रदेश में महिला हिंसा का खौफनाक रूप ज़िंदा है

नई दिल्ली 16 दिसम्बर 2012 को ज्योति सिंह जिसे आप शायद निर्भया के नाम से जानते हैं। सामूहिक बलात्कार और उससे जुड़ी हिंसा से जुझनें के बाद ज्योति सिंह ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद देश भर में महिला हिंसा पर चर्चाएं शुरू हुई।कानून में बदलाव हुए हिंसा के खिलाफ कार्यक्रम शुरू हुए। लेकिन आज बुंदेलखंड में महिला हिंसा धड़ल्ले से जारी है।
चित्रकूट में 8 दिसम्बर 2017 को अर्जुन बाबा और दो लोगों पर महिला तीर्थयात्री के साथ बलात्कार का आरोप लगा है। पीड़ित महिला का कहना है कि मैं शौच के लिए गई थी तब एक बाबा और दो लोगों ने मेरे साथ बलात्कार किया हैं।
महोबा के खरेला थाना में छह महीनें से विकलांग महिला के साथ पांच-छह लोगों द्वारा बलात्कार का आरोप लगा हैं।पीड़ित महिला का कहना है कि वो लोग धमकी  देकर बलात्कार करते थे।
बांदा के महुई गांव में शौच के लिए गई दलित लड़की के साथ दबंग लड़कों ने बलात्कार की कोशिश की। लड़की का कहना है कि मैं शौच के लिए गई थी तब बाइक से लड़के निकले तो मेरे साथ गलत काम करने की कोशिश की तब मैं भाग गई थी।2016 में महिलाओं के खिलाफ देशभर में सबसे ज्यादा हिंसा उत्तर प्रदेश में हुई हैं। राष्टीय अपराध रिकार्ड ब्यूरों ज्योति सिंह को आज याद करते हुए उत्तर प्रदेश शर्मिंदा हैं।
रिपोर्टर-खबर लहरिया ब्यूरों

Published on Dec 15, 2017