जोखिम भरा है, छोटी उम्र में मां बनना

जिला सीतामढ़ी डुमरा प्रखण्ड के भूभैरो गांव के नागेश्वर राउत की बहू कृष्णा की शादी डेढ़ साल पहले हुई थी। उस समय वह सोलह साल की थी। उनका पहला बच्चा 2 नवम्बर 2014 को हुआ। बच्चा पैदा होने के बाद मर गया जबकि पूरे नौ महीने के बाद पैदा हुआ था। जब कृष्णा की स्थिति खराब होने लगी तो उन्हें पटना रेफर किया गया। पटना पहुंचने से पहले ही कृष्णा की मौत हो गई। आषा कर्मी रेणू देवी, ए.एन.एम. पूनम सिंह ने बताया कि इन्होंने हमें कभी नहीं बताया कि इनकी बहू गर्भवती है। गांवों में अक्सर गर्भवती होने की बात छिपाया जाती है। डॉक्टर सुधा झा का कहना है कि बच्चा ठीक-ठाक हुआ था लेकिन पैदा होने के बाद महिला को एक्लैम्पसिया बीमारी हो गई। हमने उनको पटना रेफर कर दिया। इसी तरह रीगा प्रखण्ड के बुधवारा गांव के जयलस देवी डिलिवरी होने के समय ही मर गई। उनकी सास कौशल्या देवी ने बताया कि जब दर्द शुरू हुआ तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लाए। वहां उसके मुंह से फेन आने लगा तब वहां से रेफर कर दिया गया। कुछ दूर ले जाने पर मौत हो गई।

प्रखण्ड चिकित्सा प्रभारी निर्मल कुमार सिंह का कहना है कि इस घटना का सबसे बड़ा कारण है कम उम्र में बच्चा पैदा करना है। गर्भावस्था के समय नब्बे प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी होती है।