जेवर हवाई अड्डा परियोजना हो सकती है निरस्त!

 

साभार: विकिपीडिया

यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले में बहुप्रतीक्षित जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना के निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है। इस एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों से बात नहीं बनी तो सरकार इस परियोजना को छोड़ सकती है।

एक अंग्रेजी अख़बार के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने बताया कि हमने जेवर हवाई अड्डा परियोजना के लिए प्रस्तावित इलाके में पड़ने वाले छह गांवों के प्रधानों और करीब 100 किसानों से मुलाकात करके उन्हें जमीन के प्रस्तावित खरीद मूल्य और अन्य लाभों के बारे में बताया है। अगर वे हवाई अड्डे के लिए जमीन देने को तैयार नहीं होते तो यह परियोजना रद्द भी हो सकती है।

कुमार ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के लिए किसानों को 2300 से 2500 रुपए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन का मुआवजा दिए जाने की पेशकश की गई है।

यही नहीं, प्रदेश सरकार पहले चरण में आठ गांवों- रोही, परोही, बनवारीबस, रामनेर, दयानतपुर, किशोरपुर, मुकीमपुर शिवरा और रणहेरा में 1441 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है। सरकार इस परियोजना के लिये कुल पांच हजार हेक्टेयर जमीन लेना चाहती है।

करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित इस हवाई अड्डे पर विमान सेवाओं का संचालन वर्ष 2022-23 तक शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।

जेवर हवाई अड्डे की परिकल्पना सबसे पहले वर्ष 2001 में राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में की गई थी। तब से अब तक यह परियोजना अनेक हिचकोलों से गुजर चुकी है। खासतौर पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मतभेदों से इस परियोजना को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। हालांकि, भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद यह परियोजना अधर में लटक गयी।