जूनो, जूपिटर पर आपका स्वागत है!

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अगस्त 2011 में अमरीकी अंतरिक्ष संघठन नासा ने ‘जूनो’ नामक अंतरिक्ष यान सौर मंडल के सबसे बड़े गृह ‘जूपिटर’ यानि ‘बृहस्पति’ की तलाश में भेजा. इस मिशन को महत्वाकांक्षी लक्ष्य माना गया. पांच साल और 280 करोड़ किलोमीटर के सफ़र के बाद 4 जुलाई को ‘जूनो’ अपने मंजिल पर आ पहुंचा!

बृहस्पति: सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह 

बृहस्पति हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है. यह ग्रह पृथ्वी से 300 गुना बड़ा है. बृहस्पति की खोजबीन में वैज्ञानिकों का यह पहला प्रयास नहीं है लेकिन इस रहस्यमय ग्रह के बारे में कुछ ठोस जानकारी अब तक पता नहीं चली है. जूपिटर चारों ओर से, गैस के बादलों से घिरा हुआ दिखता है. उसके चेहरे पर दाग जैसा एक बड़ा और खतरनाक लाल आग का गोला भी दिखता है. किन चीज़ों से बना है यह गृह? क्या धरती पर भी यह चीज़ें मिलती है? क्या जूपिटर पर पानी मिलता है? ऐसे और कई सवालों का जवाब लेने ही ‘जूनो’ को जूपिटर पर भेजा गया है!

अंतरिक्ष यान जूनो

जूनो ऐसा अंतरिक्ष खोज यान है जो जूपिटर को छूने की कोशिश करेगा. किसी खेल के मैदान जितना बड़ा, जूनो में सात प्रकार के तकनीकी यंत्र है. इतना ही नहीं, इस अंतरिक्ष यान में ‘जूनोकैम’ नाम का कैमरा भी है जो बृहस्पति के विस्तृत फोटो भेजेगा.

जूनो अगले 20 महीनों तक लगातार बृहस्पति ग्रह के राज़ खोलते हुए लगभग सत्ताईस चक्कर लगाएगा.