जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में अव्यवस्था

BANDA

बांदा शहर। जिला अस्पताल के जले हुए मरीजों को इलाज के  वार्ड में तीन ए.सी. में एक ए.सी. कबाड़ बना है। मरीज के परिवार वाले समय से इलाज न होने की बात जोरों से बताते हैं।
30 अप्रैल 2013 को बर्न वार्ड में सात मरीज भर्ती थे। नन्हेलाल मरीज के बहनोई रामसिया ने बताया कि कमासिन क्षेत्र के मवई गांव में आग लग गई थी। बुझाने में नन्हेलाल का दाहिना हाथ और पीठ झुलस गई। नन्हेलाल आठ दिन से भर्ती है। इंजेक्षन लगाने के लिए डाक्टरों को दस बार बुलाना पड़ता है। सुदामा ने बताया कि स्टोव फटने से उसके पति का सौ में अस्सी भाग जल गया। 10 मार्च 2013 से भर्ती है। अच्छे से इलाज नहीं हुआ है। बिस्तर के चद्दर तीन दिन में बदले जाते हैं जबकि रोज बदलना चाहिए। मरीजों की ड्रेसिंग कई कई दिनों तक नहीं होती है। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के लुकतरा गांव से आई विमला ने 28 अप्रैल को अपनी 8 वर्षीय बेटी शालिनी को भर्ती किया। कुकर का ढक्कन खुलने से शालिनी का पूरा मुंह और आंखें झुलस गई हैं। दो दिन के बाद भी कोई इलाज नहीं हो पाया था।
अस्पताल की अव्यवस्था को ले के जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.षेखर और बर्न वार्ड की उपचारिका माधुरी से बात की गई तो उनहोंने कहा कि मरीज ए.सी. को फ्रिज बनायें हैं। रोटी सब्जी और पानी ए.सी. में ही घुसेड़ के रखते हैं। बजट आने के बाद नया ए.सी. लगाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि समय से सबका इलाज होता है। डा. शेखर ने बेधड़क यह बात कह डाली कि जंगल से ये लोग आते हैं और जंगल जैसे रहते हैं। इलाज करने वाला डाक्टर आर.सी. अरून दो दिन से छुट्टी में है। इस कारण से मरीजों को लगता है कि उनका इलाज रोज नहीं होता है।