जा हालत में केसे रूकहे पलायन

केन्द्र सरकार ने मजदूरन के पलायन रोके खे लाने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा)जेसी योजना लागू करी हती। जीसें गांव को आदमी अपने गांव मे परिवार के साथे रहे ओर एतईं मजदूरी कर परिवार पाले। जीमें आदमियन खा जाॅबकार्ड के तहत सौ दिन को रोजगार देय को नियम हतो। नियम के अनुसार अगर मजदूर खा काम नईं मिलत हे तो पूरी मजदूरी देय को आदेश हतो। जा योजना बुन्देलखण्ड में बोहतई कम दिखात हे। काय से आदमी खा एक दिन की मजदूरी 150 रुपइया मिलत हती। ऊमें भी आदमी रूपइया के लाने दो-दो महीना विभाग ओर अधिकारियन के चक्कर लगाउने परत हे।
अब तो सौ से डेढ़ दिन काम देय को आदेश हे, पे सरकार गांव के आदमियन के पलायन खा नई रोक पाउत हे। ऊखो मुख्य कारन हे लापरवाही सरकारी कर्मचारी मनरेगा मे काम खा लेके इत्ती लापरवही करत हे। जीखी कोनऊ नियम नइयां। प्रधान गांव में जाबकार्ड नई बनवाउत हे। जीखे बने हे जाॅब कार्ड तो प्रधान जा पंचायत मित्र धरे हे। जीसे मजदूरन से अपने मन मुताबित काम लओ हे।
हम बात करत हें महोबा जिला के गांवन की ब्लाक कबरई गांव छांनी कला के अभे दर्जन मजदूर हे जीखो एक साल से मनरेगा के मजदूरी नई मिली हे। हरजार दइयां तहसील ओर डी.एम. खा दरखास दे चुके हे। पे ऊखो कोनऊ पे असर नई परो हे। पनवाड़ी ब्लाक के जखा गांव में आदमियन के अभे जाॅबकार्ड नईं बने हे। जीसे काम से भगा दओ जात हे।
आखिर जा जिम्मेंदारी कीखी आये, की गांव के आदमियन के जाॅबकार्ड बनाये जाये। मजदूरी समय से ऊखे खातन में भेजी जाये। एक दो सरकार बड़े-बड़े वादा करत हे। जघा-जघा दिवालन में नारा लिखत हे की -’’हर हाथ को काम मिलेगा, काम नही तो दाम मिलेगा‘‘। बिना काम के दाम की बात तो दूर हे मजदूरन के खून पसीना को रूपइया नई मिलत हे। मजदूर अपनी मजदूरी पाये खा सरकारी कर्मचारियन के हाथ पांव जोड़त हे।
सवाल जा उठत हे की का एसे मे सरकार के वादा पूरो हो पेहे। का रोक पेहे मजदूरन को पलायन। ईमे केन्द्र सरकार खा अपने कर्मचारियन के ऊपर बोहतई ध्यान देय की जरूरत हे। मजदूर आदमी के साथे बोहतई अच्छे से व्यवहार करें खा चाही। समय से मजदूरी खातन में भेजे खा चाही। जीसे मजदूर आपन परिवार आसानी से चला सके।