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साभार: विकिपीडिया

कन्नड भाषा के मशहूर रचनाकार कवि कुवेम्पु का  जन्म 29 दिसंबर, 1904 में मैसूर के कोप्पा तलूक में हुआ था। वह कन्नड़ साहित्य को नयी उंचाइयों पर पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
कुवेम्पु प्रकृति के रचनाकार है और उनकी कविताओं में प्रकृति की अनुपम सुंदरता देखने को मिलती है।
गद्य और पद्य दोनों ही विधाओं में अपनी लेखनी चलाने वाले कवि कुवेम्पु का पूरा नाम कुप्पली वेंकटप्पा पुटप्पा था। लेकिन साहित्य जगत में इन्हें प्रसिद्धि कुवेम्पु के नाम से ही मिली। उन्हें ज्नाजपिथ  पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
कुवेम्पु कन्नड भाषा के प्रखर समर्थक थे और इनका मत था कि कर्नाटक में शिक्षा का माध्यम कन्नड भाषा ही होना चाहिए।
कुवेम्पु को रामायण को नए सिरे से व्याख्यायित करने के लिए खास तौर से जाना जाता है। कुवेम्पु ने अपनी किताबश्री रामायण दर्शनम्में रामायण को आधुनिक नजरिए से पेश किया, जिसे काफी पसंद भी किया गया था।
89 साल की आयु में कवि कुवेम्पु  ने 1 नवंबर 1994 को आखिरी सांस ली। साथ ही कुवेम्पु को 1988 में पद्मविभूषण से भी नवाजा गया था।