जानिए क्या है जानलेवा ब्लू वेल खेल

फोटो साभार: विकिपीडिया

खतरनाक कारनामों के लिए युवा लोगों को उकसाने वाला ऑनलाइन गेम ब्लूवेल चैलेंज भारत में भी चर्चित है। दुनियाभर में इस चैलेंज की वजह से लगभग 130 मौतें हो चुकी हैं और भारत में भी कई युवा इसके चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।

इस खेल की शुरुआत 2013 में रूस से हुई। सोशल नेटवर्किंग साइटवीकोनटेकके एक ग्रुप F57, जिसे डेथ ग्रुप कहा जाता था और इसकी वजह से पहली मौत 2015 में हुई।

रूस की एक यूनिवर्सिटी से बाहर किए गए स्टूडेंट फिलिप बुदेकिन ने दावा किया था कि उसने यह खेल बनाया है। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह चाहता था कि समाज साफ हो जाए। वह उन लोगों को खुदकुशी के लिए उकसाना चाहता था जिनकी समाज में कोई जरूरत नहीं थी। उसे 16 युवाओं को कुदकुशी के लिए उसकाने के आरोप में गिराफ्तार कर लिया गया। 11 मई को बुदेकिन को आरोपी करार देकर 3 साल की सजा सुना दी गई।

ब्लूवेल का संबंध वेल्स(मछली) की आत्महत्या से है। पानी में रहने वाले स्तनधारी जीव बीच पर चले जाते हैं। वहां उनकी डिहाइड्रेशन(पानी की कमी से), अपने खुद के वजन या हाईटाइड(अधिक खाने की आदत) की वजह से मौत हो जाती है।

भारत में ब्लूवेल चैलेंज की वजह से मौतों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब 30 जुलाई को मुंबई में एक 14 साल के बच्चे ने कथित तौर पर एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। इसके बाद इंदौर में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले एक लड़के ने 10 अगस्त को खुदकुशी करने से ठीक पहले बचा लिया गया। बताया जाता है कि उसने अपनी स्कूल डायरी में पहले के 50 स्टेज के बारे में लिख रखा था। पश्चिम बंगाल में 12 अगस्त को 10वीं क्लास के एक बच्चे का शरीर पाया गया। उसका सिर प्लास्टिक में लिपटा हुआ था और उसके गले में एक रस्सी बंधी हुई थी।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और याहू से इस खेल से जुड़े लिंक्स हटाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने इस खेल पर बैन लगाने की मांग की थी।

रूसी संसद ने सोशल मीडिया पर खुदकुशी को बढ़ावा देने वाले ग्रुप बनाने को अपराध के दायरे में रखने संबंधी बिल को 26 मई को पास किया। राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने नाबालिग बच्चों को खुदकुशी के लिए उकसाने पर क्रिमिनल पेनल्टी लगाने को लेकर एक कानून पर भी हस्ताक्षर किए। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 6 साल तक की सजा हो सकती है।