जाकिर नाईक : एक खतरनाक मजहबी कट्टरपंथी

 

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बांग्लादेश में हुए आतंकी हमलों में जब एक भारतीय नागरिक का नाम जुड़ा तो यह कहा गया कि इन हमलों में इस भारतीय की भी अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है। यह भारतीय हैं इस्लामिक धर्म गुरु डॉक्टर जाकिर नाईक।

सूत्रों के अनुसार ढाका में बीस लोगों को मौत के घाट उतारने वाले आतंकियों में से कुछ जाकिर नाईक से प्रभावित थे। इन आरोपों को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि जाकिर नाईक पर पहले भी लोगों को भड़काने और धर्म के नाम पर गुमराह करने जैसे आरोप लगते रहे हैं।

मुंबई में रहने वाले 50 वर्षीय जाकिर नाईक पेशे से एक डॉक्टर हैं। लेकिन डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उनके आदर्श साउथ अफ़्रीकी अहमद दीदात बन गए। उनसे मिलने के बाद जाकिर ने उनके कई भाषण और तर्क सुनें और अंततः उन्हीं की राह पर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया।

1991 में जाकिर नाईक ने ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ नाम से एक संस्था शुरू की। इस संस्था के द्वारा उन्होंने इस्लाम और कुरआन पर लोगों से चर्चाएं करना शुरू की। 15-20 लोगों के साथ शुरू हुआ इस्लाम पर सवाल-जवाब का यह सिलसिला इतनी तेजी से बढ़ा कि देखते ही देखते जाकिर नाईक के श्रोताओं की संख्या हजारों में जा पहुंची।

जाकिर नाईक की तरफ लाखों लोगों के इतनी तेजी से आकर्षित होने का मुख्य कारण यह है कि वे हर सवाल का जवाब धार्मिक ग्रंथों के हवाले से देते हैं। सिर्फ मुस्लिम धर्म ग्रंथ ही नहीं बल्कि तमाम अन्य धर्मों के दर्जनों ग्रंथ भी जाकिर नाईक ने कंठस्थ कर लिए हैं। वे किसी भी सवाल के जवाब में इन ग्रंथों का हवाला देते हुए उससे संबंधित पेज और पैरा नंबर तक बता डालते हैं।

आज उनके श्रोताओं की संख्या करोड़ों में है और इसका मुख्य कारण है ‘पीस टीवी’ जिसे जाकिर नाईक ने साल 2006 में शुरू किया था। यह चैनल दुबई से चलाया जाता है।

ओसामा बिन लादेन के बारे में पूछे जाने पर कुछ साल पहले उनका कहना था कि वे बिन लादेन को आतंकवादी नहीं मानते। बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि जो भी इस्लाम के दुश्मन के खिलाफ लड़ रहा है, मैं उसके साथ हूं।

जाकिर नाईक धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कभी बीवी को पीटने को जायज़ बताते हैं, कभी समलैगिकों को और इस्लाम त्यागने वालों को सजा-ए-मौत देने की बात करते हैं, कभी कहते हैं कि महिलाएं यदि ताउम्र कुंवारी रहीं तो वे वेश्यावृति की ओर बढ़ जाती हैं और कभी कहते हैं कि सुअर का मीट खाने वाले लोग वाइफ-स्वापिंग करने लगते हैं।

बीवी को पीटने के सवाल पर कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में जाकिर नाईक का कहना था, ‘कुरआन अंतिम विकल्प के तौर पर बीवी पर हाथ उठाने को कहती है. लेकिन हलके से, जैसे कि उसे रुमाल से मार रहे हों। और हां, इस मार के कोई निशान नहीं रहने चाहिए।’

महिलाओं के कुंवारे रहने का विरोध करते हुए जाकिर नाईक कहते है, ‘मैं एक मेडिकल डॉक्टर हूं इसलिए जानता हूं कि एक महिला कभी भी ताउम्र कुंवारी नहीं रह सकती। यदि वह रहती है तो उसे वैश्यावृति में जाने को मजबूर होना पड़ेगा।’

उपरोक्त बातों से साफ़ हो जाता है कि नाईक धार्मिक-कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू उनके बारे में कहते हैं, ‘मैं नहीं मानता कि जाकिर नाईक एक आतंकवादी है, वह एक धार्मिक कट्टरपंथी है लेकिन यह धार्मिक कट्टरपंथ ही आतंकवाद को जन्म देता है।’