जांच बिना इलाज और उसका नतीजा मौत, हैदरगढ़ में

जिला बाराबंकी, ब्लांक हैदरगढ़, जयचंदापुर हिंया कै मनोहर पिछले पांच साल से गोड़ के तकलीफ से परेशान रहे।आसपास के अस्पताल से लइके लखनऊ के लोहिया अस्पताल तक दवाई कराय गए लकिन सही इलाज न मिलै से 17 नवम्बर के रात 11 बजे मनोहर कै मउत होइगै।परिवार वाले के अनुसार मनोहर के मेहरारू कै मउत भी झोलाछाप डाक्टर का देखावै से भए रही।
मनोहर के परिवार वाले कै आरोप बाय कि पिछले पांच साल से बीमार रहे। गोड़ मा सूजन के वजह से भतेरिया के झोलाछाप डाक्टर का देखायन तौ वै बिना हमरे सबसे पूछे अंगूरी काटि दिहिन। जब रिपोर्ट करै कै बात कहेन तौ कहिन जा रिपोर्ट कै दिया हमार बहुत पहुच बाय।
दुबारा बड़े डाक्टर का देखावै के ताई हमरे पास पैसा नाय रहा।जब हालत बिगड़ी तौ दुबारा फिर से गांव के ही डाक्टर का देखायन तौ उनकै मउत होइगै।
मनोहर कै बेटवा राजेन्द्र कै कहब बाय कि उनके पैर मा सडन होई गए रही। वकरे बाद पूरे शरीर मा सूजन होई गए। 16नवम्बर के रात मा करीब दस बजे हालत ज्यादा ख़राब भए। डाक्टर का बुलाय के सूई दवाई भए।
मनोहर कै बिटिया माया कै कहब बाय की पांच महीना से गोड़ मा दिक्कत रही।पहले तेलीगंज के एक नर्सिंग होम मा देखावा गए दवा करावे के ताई एक भैस रही उहौ बेंच दिहन। लखनऊ लोहिया मा दवा करावे लै गयन तौ वहि हड़ताल रहा दवा नाय मिल पाय। यकरे बाद कइयो प्राइवेट अस्पताल मा दिखावागा।लकिन आराम नाय भए।
साहेबदीन रावत क्षेत्रीय पंचायत सदस्य कै कहब बाय की गांव जंगल एरिया मा बाटे। अस्पताल दूर बाय।जेकरे पास खुद कै साधन बाय वकरी ताई सारी सुबिधा बाय। जेकरे पास साधन नाय बाय ऊ मज़बूरी मा झोलाछाप डाक्टर का देखावा थै।
डाक्टर अक्षत इड्स ओ.पी.डी. बताईन की करीब दुई महीना पहिले मनोहर दवा लियै आय रहे।उपचार बतावा गए रहा। दस दिन बाद बुलावा गा रहा लकिन नाय आइन।दुबारा आये तौ पैर कै सडन ज्यादा बढ़ी रही तौ उनका लखनऊ मा रिफर कीन गा रहा।

रिपोर्ट- खबर लहरिया ब्यूरो

05/12/2016 को प्रकाशित