जगह अलग, हिंसा अलग, हिंसा करने वाले अलग, लेकिन सहने वाली सिर्फ औरत

महिलाओं को लेकर हमारे समाज की सोच कितनी बदली है यदि इस बात को जानना हो तो बुंदलेखंड की चार महिला अपराधों से जुड़ी घटनाओं पर नजर डाला जा सकते हैं। ये चारों घटनाएँ एक महीनें में ही सामने आई हैं हालंकि यह केवल वही मामले हैं जो पुलिस कार्यवाही के बाद ही सामने आये हैं। इसके आलावा बिना रिपोर्ट के मामले कितने है उनका अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुई हैं, यहां 2015 से 2016 के बीच में 6,110 घटनाएं हुई। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकडे़ बताते हैं कि पिछले चार सालों से 2015 तक में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में 34 फीसदी की वृद्वि हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादातर आपराधिक घटनाएँ महिलाओं के रिश्तेदारों और उनके पति द्वारा किए गए हैं। इन मामलों को रोकने के लिए कानून तो बन रहें हैं लेकिन उनका असर होता दिखाई नहीं देता।

इन चार घटनाओं में से पहली घटना चित्रकूट के कर्वी ब्लॉक के गांव बुढासेमरवार की है।  यहां की रहने वाली नूरानी की शादी 2012 में पड़ोस में रहने वाले हफीज के साथ से हुई। लेकिन पति द्वारा मारपीट करने की वजह से नूरानी कभी पति के साथ नहीं रही। उसका पति मुबई में काम करता था और जब पति घर आता तो वो भी ससुराल जाती थी। इस बार जब 26 जून को उसका पति घर आया तो वह उसके पास गई और वहां से लौटने के बाद उसकी मौत आग से जलने से हो गई। लोगों का कहना हैं कि उसकी पति के साथ कहासूनी हुई थी। जबकि नूरानी के मायके वालों का आरोप हैं कि उसके पति ने उससे दूसरी शादी की बात उसे कही थी, जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली।

दूसरी घटना महोबा के पनवाड़ी ब्लाक के भरवारा गांव की है , जहां 26 वर्षीय भारती के साथ 3 जून को उसके ससुराल वालों ने मारपीट के साथ उसे 3 दिनों तक घर में बिना खानापीना दिये, कमरे में बंद रखा। भारती और उसके परिवार वालों का आरोप हैं कि ससुराल वाले दहेज की मांग कर रहे थे और भारती को बच्चा ना होने का ताना भी देते थे। आखिर में, तीन दिन तक बंदी बनी भारती को उसके मायके वालों ने पुलिस की मदद से निकाला।

तीसरी घटना बांदा जिले के पैलानी थाना क्षेत्र में हुई। पड़ोस में रहने वाले इंदर ने 7 जून को 25 साल की महिला के साथ बलात्कार किया। उस समय वह घर में अकेली थी। इस घटना पर पुलिस कार्यवाही हुई और इंदर को जेल भेज दिया गया।

वहीं, चौथी घटना ललितपुर जिले के महरौनी ब्लॉक स्थित भरतपुर गांव की है, इस गाँव की सविता को उसके ससुराल वाले दहेज के लिए परेशान कर रहे थे। इसी के चलते उसके साथ  मारपीट भी शुरू हो गई थी, जिसके चलते उसने ससुराल भी छोड़ दिया था। सविता ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करती उसके पहले ही ससुराल वालों ने उसके ऊपर चोरी का मुकदमा लगा दिया।

ये चारों घटनाएं छोटे गांवों और कस्बों की हैं, जिन्हें मुख्य धारा की मीडिया में जगह नहीं मिलती है। निर्भया कांड के बाद देश की राजधानी को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर कहा गया लेकिन हमारे गांव और कस्बे भी महिलाओं के लिए कम खतरनाक नहीं हैं। ये बात हमारी ये चार अलगअलग महिला अपराध की घटनाएं साबित भी कर रही हैं।

रिपोर्ट- खबर लहरिया ब्यूरों 

Published on Jul 5, 2017