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साभार: विकिपीडिया

तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहां कोई पंचायत का चुनाव जीते बिना भी राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है। जयललिता के निधन के बाद पार्टी के अंदर सबसे बड़ा सवाल यह था कि उनकी राजनीतिक जगह कौन लेगा जो पार्टी के लिए वोट भी ला सकता हो। वोट लाने के मामले में शशिकला और ओ पनीरसेल्वम दोनों की क्षमताओं को अभी परखा जाना बाक़ी है क्योंकि चुनाव भी अभी साढ़े चार साल दूर हैं।

हर किसी को इसका अंदाज़ा था कि पार्टी की कमान शशिकला के हाथों में ही होगी। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने के बाद शशिकला इसके काबिल नहीं रहीं। सजा सुनाये जाने के बाद उन्होंने मोहलत मांगी थी लेकिन अब समय अधिक होने पर शशिकला ने बेंगलुरु जेल में सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से शशिकला को और मोहलत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट का कहना है था कि उन्हें तुरंत सरेंडर करना होगा। फैसला आने के बाद देर रात वह पहली बार जनता के सामने आकर अपने भावुक संबोधन में कहा था कि अगर वह जेल भी चली जाएं तो भी उनके विचार पार्टी के साथ ही रहेंगे।

इस फैसले के बाद अन्नाद्रमुक की महासचिव शशिकला के भरोसेमंद ई। पलानीसामी तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके साथ 31 विधायक मंत्री पद की शपथ ली। राजभवन में गवर्नर सी। विद्यासागर राव ने पलानीसामी को शपथ दिलाई। राज्यपाल ने पलानीसामी को 15 दिनों के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने को कहा है।

दरअसल, शशिकला के करीबी पलानीसामी और पांच अन्य मंत्रियों को राज्यपाल सी। विद्यासागर राव ने मिलने के लिए राजभवन बुलाया था। मुलाकात के बाद यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री पलानीसामी ही होंगे। पलानीसामी ने दावा किया था कि उसे 124 विधायकों का समर्थन है।

बता दें कि शशिकला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 570 पेज का है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा छानबीन किए गए आयकर संबंधी दस्तावेजों की अलग से जांच नहीं की बल्कि सिर्फ बचाव पक्ष के आयकर रिटर्न के कागजातों पर गौर किया। हाईकोर्ट इस केस से जुड़े अहम सबूतों पर गौर करने में नाकाम रहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जयललिता, शशिकला और दो अन्य ने साजिश रची और आगे जयललिता ने पब्लिक सर्वेट होने के तहत आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और शशिकला व अन्य दो को भी बांटी। जयललिता के अकाउंट से शशिकला के अकाउंट में फंड ट्रांसफर करना ये साबित करता है कि इस मामले में चारों सामूहिक रूप से शामिल हैं। इस मामले में ये स्वीकार नहीं किया जा सकता कि जयललिता इस पूरे मामले से अंजान रहीं।