चूड़ी बेच के काटत जिन्दगी

mahila mudda
चूड़ी बेच के काटत जिन्दगी

जिला वाराणसी, ब्लाक  हरहुआ, गावं फकीरपुर मुसलमान बस्ती। हम छः साल से विधवा हई। लेकिन हमार कउनों सुनवाई नाहीं हव। हमके त इ भी नाहीं पता कि हमा फार्म भराई कि नाहीं। हम आपन जिन्दगी चूड़ी बेच के काटत हई। कम से कम हमके कोई आसरा त ना रही। हम आपने भरोसे रहब।
इ कहब हव हमीर के। एनकर कहब हव कि हमरे पति के मरले छः साल हो गएल हव। लेकिन अभहीं तक हमके पेंशन नाहीं मिलत हव। कई बार प्रधान से कहायल आउर फोटोकापी भी दियायल लेकिन कुछ अता पता नाहीं चलल। अगर हमके विधवा पेंशन मिले लगत त हमके कुछ सहारा हो जात। हम ओकरी में रख के चूड़ी बेचीला। हमरे पास दू लइका हयन। लेकिन आज के जमाने में के लइकन के उपर भरोसा करी। पेंयान मिले लगत त तेल साबुन के खर्च निकल जात लेकिन हम चूड़ी बेच के आपन पेट चलावत हई।
इ सब के बारे में इ गंाव के प्रधान लालता प्रसाद के कहब हव कि विधवा पेंशन के लगभग छः सौ फार्म अप्रैल 2014 के भरके दियाल हव। लेकिन अभहीं तक कोई के नाहीं आएल हव। हम फार्म भर के जमा कर देहले हई।