चुनाव प्रचार के वादें अधूरे, जैसे बाँदा के बम्बिया गाँव का ये नाला

जिला बांदा, गांव बम्बिया, 12 दिसम्बर 2016। तीन साल से बम्बिया गांव में स्थिति नाला नहीं बनने से ग्रामीण परेशान हैं। यहां के निवासियों का आरोप हैं कि नाला बनाने का काम दलित बस्ती से ही छोड़ दिया है, जबकि उच्च जाति की बस्ती का नाला कब का बन चुका है। हालांकि खण्ड विकास अधिकारी रजनीश कुमार शुक्ला इन आरोपों को गलत बताकर इसकी वजह बजट का 40 प्रतिशत पैसा आवंटित नहीं होने की बात कह रहे हैं। पर इस नाले के नहीं बनने के कारण यहां के निवासियों को रात बेरात यहां से निकालने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गांव में रहने वाले 60 साल के घसीटा जी कहते हैं, “सरकारी नल से पानी भरकर घर ले जाने में  नाले को पार करने में गिरने का बहुत डर रहता है। कई बार लोग इस नाले को पार करने में गिर गए हैं।”

छग्गु, 60, कहते हैं, “इस बस्ती में दलित जाति के लोग रहते हैं, जिसके कारण ही इस नाले को बनाने में देरी हो रही है।” उनका मनना है कि अगर बड़ी जाति के लोग होते तो नाला कब का बन चुका होता।

तिजोला, 54, बरसात के दिनों में इस नाले से बहुत परेशानी होने की बात कहते हैं।

गांव के प्रधान बुद्ध विलास यादव नाला जल्द बनने की बात कहते हुए बोलते हैं, “जैसे ही नाले के लिए पैसे आएंगे, हम उतनी ही जल्दी नाले का काम शुरुकर देंगे।”

वहीं बम्बिया गांव के नाले की समस्या पर खण्ड विकास अधिकारी रजनीश कुमार शुक्ला कहते हैं, “ये मुद्दा जातिगत नहीं हैं। हर योजना के लिए पहले 60 प्रतिशत धन आवंटित किया जाता है, फिर 60 प्रतिशत काम हो जाने पर आगे का 40 प्रतिशत धन दिया जाता है। वहां भी यही किया गया है।” वह इस योजन के लिए आवंटित धन के मद की पूरी जानकारी लेने और उसके अनुसार आगे का काम करने की बात कहते हैं।

रिपोर्टर- शिवदेवी

07/12/2016 को प्रकाशित