चुनाव जागरूकता मा छोट-छोट बच्चन भी लाग हवैं

स्कूल छोड़ जागरूक करै मा लाग हन

चुनाव तौ मड़इन का बेहाल करें हवै। हर समय मड़इन का चुनाव देखात हवैं। या दरकी तौ अंधेर होइ गा चुनाव जागरूकता खातिर छोट-छोट बच्चन का भी सरकार ड्यूटी मा लगा दिहिस हवै। साथै स्कूल कालेज मा चुनाव खातिर बुकिंग चलत हवै। एक कइती सरकार कहत हवै कि शिक्षा मा बढ़ावा दीन जई गुणवत्ता नीक होइ पै का यहिनतान से होइ कि स्कूलन के कक्षा एक मा बढ़ै वाला बच्चा का भी हाथ मा दकती पकड़ा के मतदान जागरूकता का काम सऊप दीन गा हवै। जेहिका क, ख, ग नहीं आवत उंई बच्चा कसत जागरूकता का काम कइ पइहैं। दूसर कइती उनकर पढ़ाई के बरबादी होत हवै। स्कूलन मा कत्तौ पी.एसी पड़ी हवै तौ कत्तौ पुलिस का कब्जा हवै। इनतान मा कसत शिक्षा मा गुणवत्ता के बात सरकार करत हवैं। का इं छोट-छोट बच्चा जिनके हाथन मा खेले का खिलाउना होय का चाही उंई जनता का जागरूक कई पइहैं?
सरकार का सोच के या काम करिस हवैं। इं नौनिहाल का कइ सकत हवैं सरकार का चाही की मतदान जागरूकता खातिर जाने माने मड़इन का लगावै का चाही जेहिका मतदान का मतलब पता होय कि वोट डालै से का फायदा हवैं। ऊंई दूसरेन का भी समझा सकत हवैं कि वोट डालब हमार काहे अधिकार होत हवै पै छोट बच्चा तौ खुदौ बोल के नहीं जानत आहीं ऊंई बड़े मड़इन का कसत जागरूक करिहैं शासन प्रशासन बच्चन के भीड़ इक्कठा कइ के देखावै चाहत हवै कि सरकार केत्ता काम करत हवै । चित्रकूट जिला मा हर रोज प्राथमिक जूनियर अउर कालेज बंद रहत हवै जबै पूछौं तौ मास्टर कहत हवै कि हम जागरूकता के काम मा लाग हन बच्चा भी वहै मा लाग हवै का सरकार के लगे यहिके आलावा अउर कउनौ तरीका नहीं आय मड़इन का जागरूक करै खातिर। बइसे भी मड़ई अब येत्ता जागरूक हवैं कि उनका बिना समझायें पता हवै कि कसत वोट दे का हवै सरकार का पांच साल बाद बस जागरूकता करवावै का ध्यान आवत हवै। जीतै के बाद कउन जागरूक हवै कउन कउन नहीं कउनौ से कुछौ मतलब नहीं आय। या किनतान के जागरूकता आय जहां छोट-छोट बच्चा धाम मा पूर गांव कस्बा जिला के पैदल चल चल के चिल्ला चिल्ला के मड़इन का जागरूक करत हवैं। या चुनाव मा तौ उंई बच्चन का कउनौ काम भी नहीं आय काहे फिर भी उनका येत्ती बड़ी जिम्मेदारी सरकार थोपत हवै?