चुनाव का प्रचार-प्रसार खातिर कहां से आवा रुपिया

बरिया गाँव की रैली

भाजपा आपन प्रचार-प्रसार जोरन से शुरू करे हवै। नोट बंदी के समस्या अबै खत्म नहीं भे आय। मंत्री उत्तर प्रदेश के हर जिलन मा परिवर्तन रैली शुरु करिस हवै।
11 दिसम्बर 2016 का चित्रकूट जिला मा सबेरे से पार्टी वाले कर्वी, राजापुर, लालतारोड़ बरिया अउर महेवा घाट हर जघा जनता का इकटठा करिस रहै कि जिला मा केन्द्रीय पर्यटन राज्य मंत्री डाक्टर महेश शर्मा अउर केन्द्रीय खाद्य राज्य मंत्री आवत हवैं। या कहि कहि के जनता का लालच दइ-दइ के पंडालन मा भूखे पियासे सुबेरे से शाम तक बइठाये रहैं।
जहां नेता मन्त्रिन का दस बजे आये का रहै हुंवा उंई शाम छह बजे आये रहैं। इनतान के कोहरा अउर ठंडी मा ठिठुरत रही गे मंत्री का दैखे के लालच मा सोचै वाली बात हवै कि जनता एक महीना से नोट बंदी का लइके परेशान हवै।
दूसर कइती अब उई उत्तर प्रदेश का परिवर्तन करैं मा लाग हवैं। जनता का कहब हवै कि मोदी पहिले खुद का परिवर्तन कइके बाद मा उत्तर प्रदेश मा आपन हक जमाई।
केन्द्रीय मंत्री आय तौ भाजपा का प्रचार करै रहै। पै उंई बसपा अउर सपा के धोवाई करै मा लाग रहैं। शायद उंई या भूल गें रहैं कि एक दिन उंई जउन रुपिया खर्चा करिन हवै वा कहां से आवा का वा काला धन नहीं आय? कहां से आवा भाजपा के लगे येत्ता रुपिया कि उंई जघा-जघा अपना प्रचार-प्रसार करै मा लाग हवैं।
का या उनकर खुद के कमाई आय या गरीब जनता के? अगर उनके लगे जवाब हवै तौ जरुर से हमका चाही? कहे से परिवर्तन रैली मा करोड़न रुपिया तौ बहाइन हवैं वहिके हिसाब कउन देई?

राजापुर की रैली

दूसर कइती देखा जाये तौ कत्तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अउर सपा नेता आपन आपन प्रचार-प्रसार करैं मा लाग हवैं
कांग्रेस काहे का पीछे रहै वा भी बीच बीच मा आपन ताल ठोकैं मा लाग हवैं। बसपा के तौ बहुतै कम प्रचार प्रसार देखात हवै, पै जनता का कहब हवै कि कतौ हाथी आगे ना चला जाये। साइकिल तौ बिना हत्था के चली ना। पता नहीं या तौ आवै वाला समय बताई कि कउन राज्य के कुर्सी संभाली।
नेता चाहे जउन पार्टी का होय वहिका जनता के हित के बारे मा सोचा चाहिए काहे से जनता के वोट से उनका कुर्सी मिलत हवैं सरकार चाहे नोट बंदी करै या जउन भी परेशानी मंत्री का नहीं जनता का उठावै का परत हवै? एक तरफ कहां जात हवै कि नोट बंदी करै का कारन चुनाव का प्रचार न कइ पावैं। पै फेर भाजपा समेत हर पार्टी केहिके रुपिया से प्रचार प्रसार करत हवै?