चुनावी हथकंडा या किसानों की समस्या का हल?

जिला बांदा, कस्बा बांदा 4 अप्रैल का कैबिनेट के बैठक मा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी किसानन के 1 लाख कर्जा माफ़ करै का फैसला करिन है।कर्जा माफ़ी मा लघु अउर सीमांत किसानन का शामिल कीन गा है। यहिके पहिले समाजवादी पार्टी किसानन के 50 हजार कर्जा माफ़ करिन रहै।
हर राजनीतिक पार्टी किसानन के कर्जा माफ़ करै का चुनावी हथकंडा अपनावत हैं पै गहराई से किसानन के संकट के बारे मा कउनौ,राजनीतिक पार्टी कदम नहीं उठावत हैं। कर्जा पीढ़ी दर पीढ़ी से चला आवत है अउर यहिके साथे चलत है चुनावी हथकंडा राजनीतिक पार्टी का।
किसान रामावतार आउर तुलसियन का कहब है कि हर किसान परेशान है कर्ज लेबे तौ पुलिस वाले हमें पकड़ के जेल मा बेड देत हैं। यहै डर से हम कर्ज नहीं लेइत आय। किसान बिगेश्वर कुमार का कहब है कि बड़े किसान है तौ का भा, पांच साल से खेती नहीं भे आय। तौ हमार भी नुकसान होत है हम हूं तौ किसान आहीं फिर हमार कर्ज काहे नहीं माफ़ होत आय।
फूल सिंह बताइस कि सरकार का सबै किसानन खातिर बराबर कर्जा माफ़ करा चाहीं।चुनाव के समय कर्ज माफ़ी का वादा करत है पै बाद मा भूल जात है। सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार का कहब है कि कर्जा ले खातिर समय तय होवे का चाही।
सरकार अंबानी जइसे व्यापरिन का सरकार बिना ब्याज के कर्जा दिहिन है पै आपन अन्नदाता के साथ धोखा करत हैं 52 प्रतिशत किसान कर्ज मा डूबे हैं सरकार के कर्जा माफ़ी के बात तौ धोखा आय।

रिपोर्टर- मीरा देवी

13/04/2017 को प्रकाशित