चुनावी दंगल में बुंदेलखंड की महिलाओं की गैंग

जिला बांदा, 12 नवम्बर 2016। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 5 फरवरी शुरु होने वाले हैं। चुनावी आहट के बीच सभी पार्टियां राज्य को अपनी गिरफ्त में लेने के जिद्दोजहद में लगी हुई हैं। और इस बार चुनावी दंगल में प्रदेश की महिलाएं भी आगे हैं।

चुनावी मैदान की तीन महिला खिलाडियों में शामिल हैं संपत पाल, पुष्पा गोस्वामी और शीलू निशाद, ये तीनो अपने दम पर इस चुनाव के लिए अपनी दावेदारी ठोक रही हैं।

बदोसा की एक आम औरत संपत पाल,50, ने अपने गुलाबी गैंग के बूते पर दूर-दूर तक अपनी पहचान बना ली है। गुलाबी रंग की  साड़िया और लठ तो अब उनके विशेष चिन्ह सामान बन चुके  हैं। संपत इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने की पूरी आशा लिए बैठी हैं और इसके लिए उन्होंने जनता से अपना जनसंपर्क करना भी शुरूकर दिया है। संपत पहले भी दो बार विधायक के लिए चुनाव लड़ चुकी हैं, एक बार 2008 में निर्दलीय और दूसरी बार 2012 में कांग्रेस पार्टी से।

संपत आजकल घर-घर जाकर भाजपा की योजनाओं पर सवाल उठा रही हैं, और मानिकपुर क्षेत्र में रहने वाली कोल जाति को लेकर चुनाव में आगे आना चाहती हैं। सितंबर में राहुल गांधी की खाट सभा में संपत भी मौजूद थीं।

भाजपा की नीतियों के बारे में उनका कहना है, “कोलों के रहने  के लिए जगह नहीं हैं और स्वच्छ भारत के नाम पर बनने वाले शौचालयों में गड्ढे नहीं हैं। ऐसे हो रहा हैं भाजपा का स्वच्छ भारत।”

हंसमुख और बुलंद आवाज वाली संपत अपने प्रचार में बुंदेलखड़ी भाषा में गीत गाकर कांग्रेस का प्रचार कर रही हैं।

यहीं दूसरी ओर हैं, बांदा की पुष्पा गोस्वामी ,48, जो बेलन फौज की मुख्या और भाजपा की समर्थक हैं। पतली कद कठी की पुष्पा बांदा की गलियों में महिलाओं की मदद के लिए अपने बेलन फौज के साथ घूमती रहती हैं।

बेलन फौज की शुरूआत 2008 में हुई थी। पुष्पा इस नाम के जड़ के जुडी कहानी बताती हैं, “मेरे पास वाल्मीकि समाज की कुछ महिलाएं बिजली न होने की शिकायत लेकर आईं थी। मैं उनकी बात लेकर बिजली विभाग के एक्सीयन साहब के पास गई। उनके गलत तरह से बात करने पर मैंने पास में समोसे बना रहे हलवाई का बेलन उन पर मार दिया। उसके बाद हमारी पहचान बेलन फौज के रूप में होने लगी।”

आज भाजपा बेलन फौज की मदद से बांदा में चुनाव प्रचार करना चाहती हैं, पर पुष्पा अपनी मेहनत से बनी इस फौज को राजनीति में लाने में थोडा झिझक व्यक्त करती हैं। पर ये बात निश्चित है कि वह सीट मिलने पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। पुष्पा का बांदा में जन आधार है क्योंकि हजारों की संख्या में महिलाएं उनके साथ जुड़ी हुई हैं।

संपत पाल और पुष्पा गोस्वामी की तरह ही शाहबाजपुर की शीनू,23, भी राजनीति में आने का सपना देख रही हैं। तेजतर्रार और आक्रामक तेवर वाली शीलू की कहानी दुखद है। 2011 में बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उसके विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने शीलू का बलात्कार किया, जिसके बाद उन पर बहुत राजनीतिक दबाव डाला गया, ताकि बात दब जाए। उन्हें बसपा के निजामुद्दीन सिद्दीकी से लेकर मायवती तक ने पैसों का लालच देकर चुप रहने को कहा पर वह चुप नहीं रहीं। पर शीलू ने हार न मानकर अपनी पहचान एक बहादूर लड़की की बनाई। शीलू आज हमें बताती हैं कि वह राजनीति में आकर अपना बदला पूरा करना चाहती हैं। कांग्रेस में वह सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक से मिल चुकी हैं और बताती हैं कि उनके बुरे समय में कांग्रेस ने उनका साथ दिया था। वह कांग्रेस के साथ हैं क्योंकि वह मानती हैं कि कांग्रेस की राजनीति जाति आधारित नहीं है।

शीलू कांग्रेस पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी हासिल करना चाहती हैं। वह बताती हैं, “उन्हें प्रदेश महिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी पी.एल पुनिया के हाथों मिलने वाली थी, पर उन्होंने वह जिम्मेदारी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजनेता राजबब्बर के हाथों लेने की बात कही है।”
फरवरी 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए इन तीनों महिलाओं ने अपनी कमर कस ली है। अब देखना ये हैं कि राजनीति की कसौटी में कौन कितना पानी में है और पार्टियों के जोड़ घटा के बाद किसे टिकट मिलता है।

रिपोर्टर- शालिनी, मीरा और कविता 

05/11/2016 को प्रकाशित