चुनानी अखाड़े में बांदा की शीलू

Sheeluकाली धारीदार पैंट, खादी की शर्ट, मर्दानी साफी और मर्दाने जूते। साथ में चाल भी एक दम मर्दानी। गांव में आगे-आगे और पीछे से पुरूषों का झुन्ड। यह कोई और नहीं बुन्देलखण्ड की शीलू है। 2011 में शीलू के साथ बसपा के पूर्व विधायक पुरूषोत्तम नरेश द्विवेदी ने बलात्कार किया था। आज वह जेल में है। इस केस के बाद शीलू देश-विदेश की मीडिया में छाई रही है। शीलू इस साल अपने गांव सहबाज़पुर से प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रही है। खबर लहरिया ने शीलू को प्रचार के दौरान कवर किया।
जब हम गांव में अलग-अलग लोगों से मिले और चुनाव के माहौल को समझने की कोशश की तो ज़्यादातर लोगों ने कहा कि ‘शीलू दीदी की हवा सबसे ज़्यादा चल रही है। वे गाँव में रोज़ाना प्रचार के लिए आती हैं। वे गांव में लोगों को इकट्ठा करके उनके दुख-दर्द को लेकर चर्चा करती हैं। शीलू बडे़ बुज़ुर्गों के पास जाती हैं और कहती हैं-चाचा क्या हाल है? चाची क्या हो रहा है? ध्यान देना।’ खबर लहरिया ने उनसे चुनाव के संबंध में सवाल जवाब किया है।
सवाल-आपके मन में चुनाव लड़ने का विचार कैसे आया?
जवाब-चुनाव के मैदान में मुझे जनता ने उतारा है। अभी तक मेरी उमर नहीं थी। अब मैं 24 साल की हो गई हूं। मेरा मन तो बड़े चुनाव का था पर सीट ही नहीं आई थी। मैं छोटे चुनाव से ट्राई करना चाहती हूं। 2017 में मैं बडे़ चुनाव के बड़े मैदान में उतरूंगी।
सवाल-आपके क्या-क्या मुद्दे हैं?
जवाब-मैं खासकर महिलाओं के मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ना चाहती हूं। पिछड़ा गांव है, लोगों के साथ अत्याचार होते हैं। अत्याचार का मतलब जैसे दिल्ली में बलात्कार का इतना बड़ा केस हुआ है। हमारे गांव, घर और देश में महिलाओं के साथ बलात्कार, अपरहण, जलाकर मारना और बलात्कार के बाद उनको मौत के घाट उतारने जैसे केस मैंने बहुत देखे हैं। औरतों की सुनवाई नहीं होती है। रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। महिलाओं को लोग कमज़ोर समझते हैं। पर महिलाएं कमज़ोर नहीं हैं। मैं इसको दिखाना चाहती हूं। मैंने ऐसे कई केसों को डील किया है। तंेदुआ गांव में दलित लड़की के साथ प्रधान के बेटे ने बलात्कार करके पुलिया के नीचे डाल दिया था। मैने उस केस को आगे बढ़ाया। एस.पी. कार्यालय में धरना दिया तब उस लड़की की रिपोर्ट दर्ज हुई और डाॅक्टरी जांच हुई। आज वह लड़का जेल में है। दिल्ली में जब रेप का केस हुआ था तब भी मैंने हज़ारों की संख्या में लोगों को लेकर विरोध प्रर्दशन किया था। मैंने अपने इलाके में चार मुकदमें दर्ज करवाए हैं।
सवाल- आपके हिसाब से गांव में किस तरह की समस्याएं हैं?
जवाब- गांव में एक भी शौचालय नहीं है। महिलाओं को बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है। पिछले पंद्रह दिनों से चुनाव प्रचार की वजह से ज़्यादातर मैं फील्ड में रहती हूं। इन दिनों मैं खुद बाथरूम खोजती रहती हूं। खेतों में और झाडि़यों के पीछे ही जाना पड़ता है।

बाँदा के बरकोला पंचायत के प्रधान पद की प्रत्याशी शीलू निषाद 527 वोटों से हार गई। क्या इस हार से शीलू पीछे हटने वाली है? नहीं! शीलू अब 2017 के विधान सभा चुनाव के लिए तैयार है।
शीलू जैसी निडर महिला प्रत्याशी जो राजनीति की जटिल डगर पर खुद चलना चाहती हैं, और राजनीति के खेल को बदलना चाहती हैं – उनके लिए यह सफर आसान नहीं