चित्रकूट में आज न्याय के लिए संघर्ष कर रही है

जिला चित्रकूट, ब्लाक  मऊ, क़स्बा बरगढ़, गांव सुचेता कालोंनी हिंया के रहै वाली मनीषा का ससुराल वाले सत्तरह मुकदमा लगा के 2010 मा जेल मा बंद करा दिहिन रहै,पै कर्वी के वनांगना संस्था के सहयोग से मनीषा जेल से छूट के आ गे हवै । अब मनीषा सिलाई कइके आपन खर्चा चलावत हवै।
ममता का कहब हवै कि मोर शादी अवधेश के साथै भे रहै। मनस्वा कहत रहै कि तै मोहिका पसंद नही आय। यहिसे वा मोरे साथै मारपीट करत रहै। ससुर का कउनौ मर डारिस रहै तौ वहिके हत्या करै का आरोप ससुराल वाले मोरे ऊपर लगा दिहिन अउर मोहिका बेचै खातिर इलाहाबाद मा कोशिश करिन रहै। जबै उनका संतोष न भा तौ मोरे ऊपर ससुर के हत्या का आरोप लगा दिहिन । मोर छोट बहिनी देवर का बियाही हवै। वा भी मोरे खिलाफ रहै । इनतान सबै मिल के मोहिका जेल मा बंद करा दिहिन। मै दस साल तक जेल के रोटी खायेंव अउर मोर कउनौ सहयोग नहीं करिस।
मनीषा के महतारी जानकी का कहब हवै कि मनीषा का ससुराल वाले बहुतै ज्यादा मारपीट करत रहै। जेल से आवै के बाद मैं अपने मनीषा का अपने साथ राखत हौं। मोर बिन मुंह के लड़की हवै। वनांगना संस्था के समन्वक संतोष का कहब हवै कि मनीषा के ऊपर हत्या का केस चलत हवै। हमरे तरफ से वकील हवै। वहिका नियाव जरूर मिली। संस्था मनीषा का जरूरत पूर करत हवै।
वकील अनिल श्रीवास्तव का कहब हवै कि उम्मीद तौ या हवै कि मनीषा के पक्ष मा फैसला होय का चाही।
28/07/2016 को प्रकाशित

दस महीने तक जेल में रही मनीषा
चित्रकूट में आज न्याय के लिए संघर्ष कर रही है