चित्रकूट के अग़रहुणा गाँव में गरीबी की वजह से रुका टी बी का इलाज

जिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, गांव अगरहुंड़ा हिंया कइयौ पीढ़ी से टी.बी. के बीमारी फइलत हवैं। पंजाब के क्रेशर मशीन मा काम करै के कारन हिंया के मड़इन का टी.बी. के बीमारी होइ गे हवै जेहिमा अबै तक दुइ मड़इन के जान तक चली गे हवै। सरकारी अस्पताल के डाक्टर कहत हवै कि मरीजन का मुफ्त दवाई दीन जात हवै।
टी.बी. के मरीज कलावती का कहब हवै कि पहिले हमार परिवार मा कउनौ का टी.बी के बीमारी नहीं रहि आय। पै मोहिका टी.बी. होइ गे हवै थूक मा खून आवत रहै, पेट फूला रहत हवै, भूख नहीं लागत हवै। सरकारी अस्पताल से दवाई लाये हन तौ अब आराम हवै।
मरीज दिनेश बताइस कि गांव मा आशा आवत हवै तौ वहिसे दवाई लइ लेत हौ मरीज के महतारी चुन्नी देवी बताइस कि मोर दुइ लड़कन का टी.बी हवै। इलाहाबाद मा दवाई करावत रहिंव। डाक्टर नौ महीना का कोर्स बताइस रहै पै हमार रुपिया दवाई मा लागत रहै। यहै कारन ईलाज पूर नहीं होइ पावा आय।अब सरकारी अस्पताल से दवाई करावत हौं।
मरीज बबलू का कहब हवै कि सरकारी अस्पताल के दवाई आठ दिन तक खाय हौ पै बुखार नहीं उतरत रहै तौ दवाई बंद कइ दीने हौ। अब इलाहाबाद दवाई करावे जात हौं। दवाई करावे मा 30-35 हजार का कर्जा होइ गा हवै। एक हफ्ता के दवाई 6-7 सौ के मिलत हवैं।
जिला अस्पताल के डिप्टी टी.बी. एच.आई.वी कोर्डिनेटर ज्ञान चन्द्र शुक्ला का कहब हवै कि मानिकपुर क्षेत्र मा टी.वी. के बीमारी से दुइ मड़इन के जान चली गे हवै। मरीजन का हिंया से दवाई दीन जात हवै। पै कत्तौ-कत्तौ मरीज दवाई नहीं खा पावत हवै। टी.बी के बीमारी के कारन दूसर मर्ज भी पकड़ लेत हवै, काहे से मरीज कमजोर होइ जात हवैं।मरीजन का सब सरकारी सुविधा दीन जात हवै।

रिपोर्टर- सहोद्रा देवी

20/03/2017 को प्रकाशित