चिट फंड में लोगों की जमापूंजी डूबी, बांदा में हुआ विरोध

जिला बांदा, कस्बा बांदा 20 जून का पल्स वर्कर अउर ग्राहक सोसाइटी के कार्यकर्ता अउर एजेंट एस.डी.एम मंसूर आलम का ज्ञापन दिहिन है। काहे से पल्स कम्पनी मा मड़ई जउन रुपिया जमा करत रहै।वा कम्पनी 22 जुलाई 2014 का बंद होइ गे है। या कम्पनी मा 6 करोड़ मड़इन का 60 हजार करोड़ रुपिया फंसा है।जिला बांदा, कस्बा बांदा 20 जून का पल्स वर्कर अउर ग्राहक सोसाइटी के कार्यकर्ता अउर एजेंट एस.डी.एम मंसूर आलम का ज्ञापन दिहिन है। काहे से पल्स कम्पनी मा मड़ई जउन रुपिया जमा करत रहै।वा कम्पनी 22 जुलाई 2014 का बंद होइ गे है। या कम्पनी मा 6 करोड़ मड़इन का 60 हजार करोड़ रुपिया फंसा है। फरवरी 2016 का सुप्रीमकोर्ट के जज आर एम लोढ़ा एक कमेटी बनाइन है जेहिमा आदेश दीन गा है कि छह महीना मा कम्पनी के सम्पत्ति बेच के मड़इन का रुपिया लउटावा जाए पै एक साल होय के बाद भी मड़इन का रुपिया नहीं लउटावा गा आय।यहै कारन पल्स मा काम करै वाले मड़ई एस. डी.एम का ज्ञापन दिहिन है। पल्स वर्कर अउर ग्राहक सोसल सोसायटी के संरक्षक प्रदीप कुमार अउर प्रवक्ता गणेश का कहब है कि भारत सरकार पल्स कम्पनी चलाइस अउर खुदै बंद कइ दिहिस है जेहिसे पल्स मा काम करै वाले 80 लाख मड़ई बेरोजगार होइगे हैं 35 हजार पल्स एजेंट का गाली अउर जान से मारे के धमकी मिलत है।एक महीना मा हमार सुनवाई न होय तौ प्रदर्शन करबै।  एजेंट जितेन्द्र अउर रितेश बताइन कि मड़ई हमसे आपन रुपिया मांगत है अउर गाली देत है अउर कहत है जहां से कयि पाय हुंवा से देय हमार सुनवाई न होइ तौ हम आत्महत्या करबै अउर आन्दोलन करबै।  कोतमा बताइस कि मजदूरी कइके दस हजार चार सौ रुपिया साल भर मा जमा करत रहि हौं अबै हमार रुपिया नहीं मिला आय। छोटे बजट का बड़ा करें खातिर मड़ई पेट काट के रुपिया जमा करत रहै पै अबै तक इं मड़इन का नहीं पता आय कि उनकर रुपिया डूब गा कि वापस मिली। बांदा के तीन लाख मनई पल्स मा काम करिन हैं।

रिपोर्टर-  खबर लहरिया ब्यूरो

28/06/2017 को प्रकाशित