चर्चाएं, नई नज़र से – काम के दम पर मिले पुरस्कार और कमाया सम्मान

 

ममता जेटली
ममता जेटली

ममता जैतली राजस्थान में कई सालों से सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे लम्बे समय से नारीवादी आन्दोलन का हिस्सा रही हैं। उन्होंने 1998 में विविधा न्यूज़ फीचर्स की शुरूआत की थी जो महिलाओं पर हो रही हिंसा, और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर फोकस करती है। वे राजस्थान में ‘उजाला छड़ी‘ नाम का अखबार प्रकाशित करती हैं जो विकास और अन्य स्थानीय मुद्दों पर खबरें छापता है

शमा खान को अपने बेहतर काम के लिए कई पुरुस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। भारत सरकार द्वारा इन्हें इंडो चाइना यूथ एक्सजेंच प्रोग्राम के तहत ग्यारह दिन की चीन देश की यात्रा में भेजा गया। अप्रैल 2011 में उन्हें विज्ञान भवन में पंचायती राज सशक्तीकरण के राष्ट्रीय और नवंबर 2012 में उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार भी दिया गया। शमा खान पहली मुस्लिम महिला हैं जो चैहटन बाड़मेर से प्रधान चुनी गई हैं। वह 2005 में पंचायत समिति की सदस्य चुनी गईं।

प्रधान मैं हूं वो नहीं
वर्ष 2010 के पंचायती राज चुनावों में शमा निर्विरोध प्रधान चुनी गईं। चोहटन के इतिहास में ये पहला मौका था जब कोई प्रधान निर्विरोध चुना गया। शमा ने राजनीति में काफी जगह बना ली थी। बैठकों में गांव के लोग, किसी समस्या की सुनवाई के लिए अर्जी लेकर मेरे पति के पास  पहुंच  जाते। मैं तपाक से कहती, जब प्रधान मैं हूं तो आप उनके पास अर्जी लेकर क्यों जा रहे हो।

आप प्रधान बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं ?
शमा बताती हैं कि उनके कार्यकाल में वर्ष 2004 में स्कूलों में बालिकाओं का नामांकन साढ़ेे पांच सौ से छह हजार पांच सौ पचास हो गया। शमा कहती  हैं , ‘‘एक दिन चिचड़ासर ग्राम पंचायत के आलू का तला गांव गई। वहां स्कूल की लड़कियों से मिली। मुझे तब खुशी हुई जब इन बालिकाओं ने कहा कि जब आप प्रधान बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं? हम भी आपकी तरह एक दिन प्रधान बनेंगी।’’

शमा कहती हैं, ‘‘पंचायतों की बैठकों में जब महिला जनप्रतिनिधि रजिस्टर में अंगूठा, लगाती हैं तो मुझे बुरा लगता है। मैं चाहती हूं कि हर महिला पंच-सरपंच अंगूठे के निशान की जगह दस्तखत करें।“ इसके लिए शमा हर मंच पर तालीम की बात कहती हैं ।

उन्हांने अपने इलाके में ‘‘पधारो म्हारी लाडो’’ अभियान चलाया। बेटी के जन्म पर थाली बजाने की परंपरा शुरू की। 0 से 3 माह की बेटियों को स्वास्थ्य किट बंटवाए। उन्होंने बाल विवाहों पर रोक लगवाई। शमा पंचायत समिति में भी अपना रुतबा रखती हैं। वे बेझिझक अधिकारियों, कर्मचारियों से बात करती हैं।