ग्रामीण स्वस्थ्य पर ख़ास नज़र बाँदा जिले के गोपरा गाँव पर, टी बी की जांच बस नाम की

जिला बांदा, ब्लाक नरैनी, गांव गोपरा हेंया टी वी के बीमारी फइल रहि हैं तबै तीन महीना पहिले या खबर लहरिया मा छापा गा रहै वहिके बाद स्वास्थ्य विभाग से जांच टीम बीमार मड़इन के जांच करिन रहैं। जेहिसे अब कुछ मड़इन का फायदा मिला है।
स्वास्थ्य विभाग कहत है कि मड़इन का भी आपन बीमारी का लइके लापरवाही न करै का चाही।
बाबादीप का कहब है कि हमें जउन दवाई दीन गें रहै। सात गोली इक्कठा खा लीने रहेंव। जबै रात के खांसी आयी है तो मुंह से खून निकलत रहै। डाक्टर के पास नहीं गये रहेंव आशा बहू से बताये हौ तौ वा कहत रहै कि बीमारी झरत आय।
सीताराम बताइस कि दवाई करावै से मोहिका फायदा मिला है। मोर इलाज छः महीना चला है। आराधना का कहब है कि हमरे गांव मा एक दरकी डाक्टर के टीम जांच खातिर आयी रहै।
बेटीबाई अउर ज्ञान देवी का कहब है कि अब डाक्टर हमार गांव मा नहीं आवत यहै कारन प्राइवेट दवाई करावै मा दुइ तीन हजार हर दरकी लागत है जेहिसे हमार सब जानवर गाय बैल बिक गें है।
टी.वी–रोग विशेषज्ञ ए.के. सिंह का कहब है कि गांव मा एन जीओ जांच खातिर लगाये गें है जउन घर-घर जाके जांच करत है।
टी.वी. रोग प्रोग्राम मैनेजर प्रदीप वर्मा का कहब है कि हमें पता नहीं रहत कि केहिका दुइ हफ्ता से ज्यादा खांसी आवत है। यहै कारन एन.जी. ओ से जांच कराई जात है। विकलांगता है तौ उनकर भी जांच होइ जात हैं।

रिपोर्टर- गीता

13/02/2017 को प्रकाशित