गौरक्षा पर सरकारी काम बेहाल, देखें सच बुंदेलखंड की जमीन से

19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और अप्रैल 2017  में नई योजनाओं का ऐलान किया था। इनमें से किसान कर्जमाफी,गौशाला और एन्टीरोमियो दस्ता प्रमुख थे। क्या एक साल में लोगों को इन समस्याओं से छुटकारा मिला है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लोक संकल्प पत्र में गौरक्षा को ध्यान में रखकर प्रदेश में डेयरी उद्धोग को बनाने की बात कही थी। लेकिन एक साल होने के बाद भी ये योजना असली जामा पहने नहीं दिख रही है। महोबा जिले के गांव बरबई के प्रधान देवचरण का कहना है कि हमने जो गौशाला बनवाई है उससे किसानों को बहुत राहत मिली है। कल्लू का कहना है कि अन्ना जानवर से किसान रात-दिन परेशान हैं।
विधायक आर. के. पटेल का कहना है कि किसान सरकार पर आश्रीत हो जायेगा तो यह समस्या कभी खतम नहीं होगी इसलिए किसान को अपनी फसल खुद बचानी पड़ेगी। यहां जो गौशालायें चल रही है उसमे हर पशु को तीस रूपये के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं।
किसान विमला देवी ने बताया कि रात में टार्च लगाकर जानवरों को देखना पड़ता है। बंशीधर पाठक का कहना है कि इस तरह की ठंडी में जानवरों को ताकना पड़ता है इसलिए अन्ना जानवरों की समस्या के कारण साठ प्रतिशत लोग बाहर चले गये हैं। अमरजीत का कहना है कि इस क्षेत्र में लगभग दाई सौ अन्ना जानवर हैं जो बहुत परेशान करते हैं। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष राम सिंह पटेल का कहना है कि सब जगह ज्ञापन दे चुके है लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता है।देवराज गौश्ला के संस्थापक राजेश कुमार का कहना है कि हम दो-तीन साल से गायों की रक्षा के लिए प्रयास कर रहे हैं।
पशु चिकित्सक देवेन्द्र सिंह का कहना है कि यहां सात प्राइवेट रजिस्टर्ड गौशाला हैं। सरकारी गौशाला एक भी नहीं है। चित्रकूट में इस समय लगभग पचपन हजार अन्ना जानवर हैं।

रिपोर्टर- खबर लहरिया ब्यूरों

Published on Mar 22, 2018