गांव में रोज़ उठला कूड़ा के ज़हरीला धुआं

10-10-13 Taza bhuhar kudaबनारस। स्वच्छता अभियान के लेके सरकार आधा प्रतिशत कर बढ़ा दिहले हव। एके सेवाकर में जोड़के लेवल जाई। अभी तक चैदह प्रतिशत सेवाकर रहल अब वह बढ़कर साढ़े चैदह प्रतिशत हो गएल हव। यानी स्वच्छता अभियान में होवे वाला खर्चा अब जनता उठाई। मगर का उकरे बाद भी लोगन के गंदगी से राहत मिली? या का एक साल में स्वच्छता अभियान लोगन के प्रदूषण रहित जीवन देहले हव।
बनारस के रमना गांव के लोगन के खातिर स्वच्छता अभियान गले के फांस बन गयल हव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट होवे के कारण इहां सफाई रखे के दबाव सबसे ज़्यादा हव। इ दबाव के चलते इहां के नगर निगम पूरे बनारस के कूड़ा रमना गांव लाके गिरावत हव। रमना गांव में फेंकल जा रहल कूड़ा के ज़हरीला धुएं आउर दुर्गंध से उहां के लोगन के लिए सांस लेब मुश्किल हो गएल हव। इ गांव से लगल डाफी, नरोत्तमपुर, नैपुरा गांव के लोग के कहब हव कि ‘कूड़े के बदबू तो जीना हराम करके रखले हव अब इ कूड़ा के जलावल भी जात हव। ’ इहां के हवा बदबूदार आउर ज़हरीला होल जात हव। उठे वाले धुएं से हमने के आंख में जलन होत हव। लइकन बच्चन के खांस-खांस के बुरा हाल हव।
रमना की सरोज, सीमा, विनीता, पप्पू, विजशंकर इ सब लोगन के कहब हव कि अगर नगर निगम के तरफ से कूड़ा के निस्तारण के कउनों उपाय नाहीं करल गएल तो हमने धरना दिहल जाई। आखिर हमने के आउर हमने के बच्चन के सेहत के सवाल हव। नैपुरा गांव के विक्की, चुनमुन बतातवलीन कि ‘शाम होत होत तक पूरा गांव धुएं से ढक जाला। लेकिन सरकार के तरफ से कउनों कदम नाहीं उठत हव। आग के बुझावे खातिर के बोरिंग लगावल गएल हव लेकिन अब उ भी बन्द हव।
वाराणसी नगर निगम के अपर नगर आयुक्त श्री बी.के. द्धिवेदी क कहब हव कि ‘हमने लगातार कोशिशें करत हई। जल्दी ही कउनों रास्ता निकाल लेवल जाई।’