गणतन्त्र दिवस पर जाबांज बच्चों को देश का सलाम, इस साल 18 बच्चों को मिला बहादुरी पुरुस्कार

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

इस वर्ष गणतन्त्र दिवस से पहले यानी 24 जनवरी को, दूसरों की जिंदगी बचाने वाले साहसी और वीर 18 बच्चों को वीरता पुरस्कार से नवाजा गया।
इस बार का भारत पुरस्कार जुए और सट्टेबाजी के खिलाफ आवाज उठाने वाली आगरा की नाजिया को दिया गया। जिन 18 बच्चों का नाम इसके लिए चुना गया है, उनमें से तीन बच्चों को मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को अपने हाथों वीरता पुरस्कार प्रदान किये। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बच्चों के लिए एक स्वागत कार्यक्रम का आयोजन भी किया।
आईये जानते हैं इन साहसी बच्चों के बारे में….
भारत पुरस्कार विजेता 16 साल नौ माह की नाजिया आगरा के मंटोला की रहने वाली हैं। नाजिया ने अपने घर के पड़ोस में कई दशकों से चल रहे जुए और सट्टे के अवैध व्यवसाय के खिलाफ आवाज उठाई। इसके लिए पहले सबूत जुटाए और फिर 13 जुलाई 2016 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। नाजिया की पहल से चार लोगों की गिरफ्तारी हुई और व्यवसाय बंद हो गया।
राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले पंकज सेमवाल, टिहरी गढ़वाल जिले के प्रतापनगर के नारगढ़ गांव में 10 जुलाई की रात अपनी माता विमला देवी और अपने भाईबहन के साथ दूसरी मंजिल पर घर के बरामदे में सो रहे थे। रात 1 बजे गुलदार ने घर की सीढ़ियों से घात लगाकर विमला देवी पर हमला कर दिया। विमला देवी के शोर मचाने पर पंकज जाग गए और बहादुरी के साथ अपने पास में रखे हुए डंडे से गुलदार पर वार करने लगे। शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंच गए और घायल विमला देवी को अस्पताल पहुंचाया।
महज छह साल आठ माह की ममता दलाई ने छह अप्रैल 2017 को ओडिशा के केंद्रापाडा जिले में रहने वाली ममता और आसंती पास के तालाब में नहाने गई थीं। तालाब में पास की नदी से एक मगरमच्छ घात लगाकर बैठा हुआ था। पांच फुट लंबे मगरमच्छ ने अचानक आसंती का हाथ मगरमच्छ ने जबड़े में दबा लिया। ममता ने उस वक्त सूझबूझ दिखाते हुए आसंती का हाथ पकड़े रखा और इतनी जोर से चिल्लाई कि मगरमच्छ की पकड़ ढीली हो गई। पकड़ ढीली होते ही उसने आसंती को बाहर खींच लिया।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की लक्ष्मी यादव दो अगस्त 2016 को अपने मित्र के साथ गणेश नगर इलाके में खड़ी थी। इसी दौरान वहां पहुंचे तीन बदमाशों ने उन दोनों के साथ मारपीट की। लक्ष्मी को बदमाशों ने जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाया और एक सुनसान स्थान की ओर ले गए। उसने बहादुरी का परिचय दिया और किसी तरह मोटरसाइकिल की चाबी निकालकर छुपा दी और वहां से भाग निकली तथा पुलिस थाने पहुंचकर घटना की सूचना दी। तत्काल हरकत में आई पुलिस ने तीनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया।
संजय चोपड़ा पुरस्कार पंजाब के 17 वर्षीय करणबीर सिंह को प्रदान किया गया जिसने नाले में गिरी एक स्कूल बस से 15 बच्चों को बचाया था। करणबीर खुद भी इसी बस में था और वह घायल हो चुका था लेकिन उसने दूसरे बच्चों को पानी से भरी बस से निकलने में मदद की।
मेघालय के 14 वर्षीय बेत्शवाजॉन पीनलांग, और केरल के सेब्सटियन विसेंट (13) को बापू गैधानी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पीनलांग ने अपने तीन साल के भाई को जल रहे घर से निकाला था।
डूब रहे दो बच्चों की जान बचाने की कोशिश के दौरान अपनी जान गंवा बैठी कर्नाटक की 14 वर्षीय नेत्रवती एम चव्हाण को मरणोपरांत, गीता चोपड़ा पुरस्कार प्रदान किया गया। उसने 16 वर्षीय मुथु को बचा लिया लेकिन 10 वर्षीय गणेश को बचाने के दौरान वह अपनी जान गंवा बैठी। मिजोरम के 17 वर्षीय एफ लालछंदमा तथा मणिपुर से 15 वर्षीय लौकरापाम राजेश्वरी चानू को भी मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
पांच श्रेणियों में दिए जाते हैं वीरता पुरस्कार जिनमें भारत पुरस्कार, गीता चोपड़ा पुरस्कार, संजय चोपड़ा पुरस्कार, बापू गैधानी पुरस्कार, सामान्य राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार।