खोज के अनुसार ज़्यादातर भारतीय सम्पूर्ण आहार नहीं खाते

 

साभार: विकिपीडिया कॉमन्स

भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ताजे फल, हरी सब्जियां, दाल, मांस और दूध आदि सम्पूर्ण आहार नहीं लेती हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण(एनएफएचएस-4) 2015-16 से पता चला है कि सभी महिलाओं की तुलना में आधे से कम यानि तकरीबन 47% महिलाएं रोजाना हरे, पत्तेदार सब्जियां खाती हैं जिनमें से भी 38% ऐसी महिलाएं हैं जो सप्ताह में केवल एक बार हरी पत्तेदार सब्जियां खाती हैं। महिलाओं को पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा कैलोरी की जरूरत होती है। घरेलू महिला को दिन भर में 2100 कैलोरी की जरूरत होती है वहीं खेती या मजदूरी करने वाली महिला को 2400 कैलोरी की जरूरत होती है। महिलाओं को पूरे पोषण के लिए भोजन में दाल, चावल, रोटी और हरी सब्जी दोनों समय लेना चाहिए। फल और दूध को आहार में शामिल करना चाहिए। खाने में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए। लेकिन खोज बताता है कि केवल आधे से भी कम 45% महिलाएं ही दाल या बीन्स रोजाना खाती हैं। सात प्रतिशत महिलाओं की पहुंच में दूध या दही नहीं है जबकि 25% महिलाएं डेयरी उत्पादों का कभी-कभी उपभोग करती हैं। चौंकाने वाली बात है कि भारत में 54% से अधिक महिलाएं, सप्ताह में एक बार भी फल नहीं खाती हैं। बहुत कम महिला रोज़ाना चिकन, मांस, मछली या अंडे का उपभोग करती हैं। निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय महिलाओं की आदतें स्वाभाविक नहीं हैं और न ही इनमें पिछले 10 सालों में कोई बदलाव आया है। वह आज भी घर में सभी के खाना खाने के बाद खाती हैं और बासी खाना खाती हैं। सर्वेक्षण में देखा गया है कि राज्यों में भी आहार पैटर्न का चल रहा है। जिसमें महिलाएं राजस्थान (61%), केरल (63%) और उत्तर प्रदेश (73%) में, भारत के बाकी हिस्सों की तुलना में कम से कम एक सप्ताह में हरे पत्तेदार सब्जियां खाती हैं। वहीं, सप्ताह में एक बार कम से कम दूध या दही 24% मिजोरम में और 30% ओडिशा में, हरियाणा में 91%, कर्नाटक में 93%, और सिक्किम में 96% महिलाएं लेती है जबकि फल ओडिशा में 19% से लेकर केरल में 83% महिलाएं लेती है।