क्यों न्याय का भार ले लेती हैं जाति आधारित पंचायतें, देखें ललितपुर जिले के भदौरा गांव में

ललितपुर जिले के महरौनी ब्लाक के मदौरा गांव में समाज का एक भयानक चेहरा दिखा है। 3 अगस्त 2017 को गेंदा और बिन्द्रबान ने अपने अठारह साल के बेटे को खो दिया था। बेटे की लाश उन्हें पेड़ पर लटकी मिली थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के तहत आत्महत्या का मुकदमा दर्ज किया था वही गांव वाले लड़के की माँ के ऊपर हत्या का आरोप लगा कर पंचायत लगाई। जिसमें उस महिला को दो बार सिर मुड़वाने और एक लाख रूपये देने को कहा। गरीब महिला अपनी एक एकड़ जमीन बेंच कर एक लाख रूपये भरे।अब सवाल यह उठता है कि इस घटना को पुलिस आत्महत्या बता रही है तो गांव वाले किस आधार पर उस महिला को दोषी मान रहें हैं? इस पूरी घटना कि जांच सुनवाई और फैसला हमारी न्याय व्यवस्था ने नहीं सुनाया हैं। इक्कीस गांव के पंचपरमेश्वरों ने यह फैसला सुनाया हैं।
बिन्द्रबान का कहना है कि पंचायत ने हमारे उपर एक लाख चालिस हजार का जुर्माना लगाया है। छब्बीस हजार का सौदा आया है। एक लाख रूपये नगद दिये है। पंचायत में इसी तरह के फैसले होते है किसी को ग्यारह सौ तो किसी को पांच सौ का जुर्माना किया जाता है। गेंदा का कहना है कि कोई अपने बेटे को नहीं मारता है लेकिन मुझे बेटे की मौत का दोषी बना दिया है।
प्रधान रति राम का कहना है कि दस पन्द्रह गांव के पंचो ने यह फैसला किया है। जिसमें कहा गया था कि गंगा में नहा के सिर मुड़वा लों।
गोपनीय सूत्रों को अनुसार जानकी साहू, मोहन साहू, सन्तोष साहू और सुरेश ने गेंदा के लड़के को मारा है। दबाव के कारण गेंदा ने अपने बयान बदल दिए हैं। ललितपुर के पुलिस अधीक्षक सलमान राय पाटिल इस घटना के बारे में बात करने से मना कर दिया है।
रिपोर्टर-सुनीता प्रजापति और राजकुमारी

Published on Dec 14, 2017