महिला प्रधान होना नारीवादी बात, या फिर ढकोसला?

जिला बारांबकी, ब्लाक हैदरगढ़ भारतीय समाज शुरू से ही पुरुष प्रधान रहा है जेकरे ताई हम सशक्तिकरण कै बात करत रहेन अउर उनका आगे बढ़ावे के ताई आरक्षण दिये कै बात भी करेन।अब मेहरारुन का राजनीति मा तैतिस प्रतिशत आरक्षण मिला बाय पर का वाकई मा आरक्षण से राजनीति मा आई मेहरारू आपन निर्णय खुद लै पावति अहैं। ऐसन ही कुछ देखन हम बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र मा।जहां हम तीन महिला प्रधान से मिलेन। जिला बारांबकी, ब्लाक हैदरगढ़ भारतीय समाज शुरू से ही पुरुष प्रधान रहा है जेकरे ताई हम सशक्तिकरण कै बात करत रहेन अउर उनका आगे बढ़ावे के ताई आरक्षण दिये कै बात भी करेन।अब मेहरारुन का राजनीति मा तैतिस प्रतिशत आरक्षण मिला बाय पर का वाकई मा आरक्षण से राजनीति मा आई मेहरारू आपन निर्णय खुद लै पावति अहैं। ऐसन ही कुछ देखन हम बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र मा।जहां हम तीन महिला प्रधान से मिलेन।  माहेजबी महिला प्रधान से उनकै नाम पूछा गा तौ उनकै आदमी मुसीर बतावै लागिन। इनकै नाम माहेजबी बाय। हम इनकै पति मुसीर दुइनौ जने मिलके ग्राम पंचायत के काम का पूरा करीथी। इनकै एक सोच रही की इनकै मायके कै मनई राजनीति से जुड़ा अहैं। इनके अन्दर एक सोच रही की समाज मा निकलके काम कीन जाय। अउर अवसर भी आइगा। जब प्रधानी महिला सीट भय।प्रधानी जीती अउर अब काम भी कराथिन। इनके पति हुवय के नाते हम इनके साथे काम करीथी।क्षेत्र मा ज्यादा से ज्यादा समय दिये कै कोशिश करीथी बाकी हमार आदमी कराथिन। बनी कोडार गांव कै प्रधान मंजू देवी कै कहब बाय की हमरे ससुर के आगे से ही देवर प्रधानी देखाथे हम घर कै काम करीथी । दयाराम का पुरवा कै प्रधान माधवी देवी कै कहब बाय की हमार गांव काफी पिछड़ा रहा ई सोच के प्रधानी लड़ेंन कि गांव कै विकास करब। अउर जनता सहयोग करिस प्रधान भी बनि गयन। प्रधानी के साथ-साथ घर कै काम करीथी जहां जरुरत पराथै वहि जाईथी दस्तखत हम करीथी बाकी प्रधानी देवर जी कराथे।

रिपोर्टर- नसरीन 

Published on Jul 5, 2017