केले की खेती देखनी है चलिए बाराबंकी जिले के भुल्भुलिया गांव में

बाराबंकी जिला कै भुल्भुलिहा गाँव केला के खेती के ताई जाना जाथै। हियां के देशराज पिछले पांच साल से केला कै खेती कराथे। तौ चला हमरेव सब  केला के खेती के बारे मा जानी।
देशराज किसान कै कहब बाय की कमसे कम पांच एकड़ खेती मा एहि बार खेती करे हई। जून महीना मा रोपाई किया जाथै। केला कै पौधा बंगलौर से आवाथै  वकरे बाद हम खेत बनायके वहमा रोपाई कै दींन जाथै।
रामबरन यादव किसान कै कहब बाय की भिटरिया से पेड़ लाई थी वकरे बाद टाइम से लगाईं लगावै के बाद खाद पानी डाला जाथै। एकै सिचाई निजी नलकूप से कीन जाथै जब नहर आवाथै तौ नहर से सिचाई कींन जाथै। बारह से पंद्रह दिन के अन्दर सिचाई करै का पराथै। अपने जानकारी में कोई कमी नही छोड़ी खेती करने में लेकिन जिस हिसाब से करते है उस हिसाब से फायदा नही होता।
देशराज कै कहब बाय की आगे पीछे हुआ कराथै सब एक साथ नाय हुवत। पांच सौ पेड़ लगावै तौ दुई सौ जल्दी कटी जाथै। कुछ सितम्बर मा कुछ अक्तूबर मा कटी जाथै। कुछ निजी खेत कुछ कोंट्राक्ट पै लै लिया जाथै। केला कै पौधा अलग-अलग प्रजाति कै हुआथै कुछ बौना टाइप कै हुआथै। एक कैलाक्षी प्रजाति कै हुआथै जेका लोग अच्छे भाव मा मार्केट मा बेंच लियाथिन। अउर जवान बौना टाइप कै हुआथै वकै दाम कम मिलाथै। व्यापारी खेत मा ही आवाथिन यहीं से कटवाय के लै जाथिन। यहि समय बहुत सस्ता बाय चार-पांच सौ रुपया कुंतल। लखनऊ से इलाहाबाद तक बेचा जाथै।

बाईलाइन-नसरीन

20/10/2017 को प्रकाशित