किसान आ गये भुखमरी के कगार पे

Sampaadakiya - Mahoba Kisaan Cardउत्तर प्रदेश सरकार गरीब जनता की भलाई खे तो सोचत हे पे पूरा नई करत हे। महोबा जिला के कबरई ब्लाक के गांवन के किसानन की जमीन बांध डूब क्षेत्र में जात हे, पे सरकार ऊखो मुआवजा काय नई देत हे।

गरीब किसान जमीन के मुआवजा खा लेके केऊ दइयां धरना धरो हे, पे कोनंऊ सुनवाई नई भई आय। सरकार गरीब किसानन की जमीन तीन साल से लेके बांध बनवाए को काम करत हे। सरकार गरीब किसानन के मुआवजा को कोनऊ ध्यान नई देत आय। गरीब किसान खे परिवार पाले खे जमीन एक हीरा के बराबर होत हे। किसानन खे तीन साल से न मुआवजा मिलो हे ओर न खेती में अनाज उगाए खा परिवार पाले में बोहतई परेशानी आउत हे। जीसे किसान आत्महत्या करे खे मजबूर हो जात हे। एक केती तो सरकार बांध बनवा के जमीन खे सिंचाई की सुविधा करत हे दूसर केती सरकार गरीब किसान की जमीन लेके ऊखे परिवार खे बेसहारा करत हे। आखिर सरकार किसानन के साथे एसो काय करत हे?
सोचे वाली बात जा हे कि सरकार ऊखे सुविधा न देके गरीब किसान खे भुखमरी ओर सड़क पे आए खे काय मजबूर करत हे। धरना धरे वाले किसान लगभग पांच सौ से ऊपर हते जभे कि सरकार ढाई सो किसानन को मुआवजा देय खे कहत हे। तो बाकी गरीब किसान आपन परिवार खा लेके कहा जाएं? सरकार गरीब किसान की जमीन लेके बांध बनवा के नाम कमाए चाहत हे। जभे कि सरकार ग्रीन कार्ड या फिर के्रडिट कार्ड को लोन लओ रूपइया ब्याज भरा लेत हे, तो सरकार ढाई सो गरीब किसानन कि तीन साल से जमीन के रूपइया काय नई देत आय?