किसानों का गेहूं नहीं खरीद पाई सरकार

 

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
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उत्तर प्रदेश में गेहूं की अच्छी खासी फसल होने के बाद भी यहां की सरकार किसानों से गेहूं खरीदनें में असफल रही। इसलिए अब उत्तर प्रदेश में पी.डी.एस. (सार्वजनिक वितरण) के तहत बंटने वाला गेहूं पंजाब और हरियाणा के किसानों से खरीदा जाएगा।
पी.डी.एस. को चलाने के लिए जिम्मेदार संस्था भारतीय खाद्य निगम ने यह फैसला लिया है। हालांकि किसी भी राज्य में पी.डी.एस. के तहत गरीबों को बांटा जाने वाला गेहूं उसी राज्य के किसानों से खरीदा जाता है।
खोले गए गेहूं खरीद केंद्र-
उत्तर प्रदेश में इस बार गेंहूं खरीदने के लिए 6,000 केंद्र खोले गए थे। ग्रामीण इलाकों में हर 8 किलोमटर की दूरी में ये केंद्र खोेले गए थे। गेहूं का सरकारी दाम भी बढ़ाकर 13,50 प्रति कुंतल कर दिया गया था। अधिकतर गेहूं खरीद केंद्रों में पल्लेदारों की कमी और किसानों के रुकने का इंतजाम ठीक नहीं था।

कम जानकार बागवानी किसान 
सब्जियों और फलों के उत्पादन क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश में सब्जी और फल किसान खेती की आधुनिक तकनीकी जानकारी में पिछड़े हैं। कम जानकारी के कारण हर साल इस बागवानी के क्षेत्र में दस करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। देश के उद्योगों से संबंधित अध्ययन और शोध करने वाली संस्था एसोचैम की शोध रिपोर्ट में यह कहा गया है। सब्जियों और फलों की फसल कटने के बाद खेती को उपजाऊ बनाने की आधुनिक तकनीकों के बारे में यहां के किसान कम जानकार है।