का होला स्वास्थ्य केन्द में

जिला वाराणसी। सरकार हर गावं में स्वास्थ्य केन्द्र बनवइले हव ताकि गावं के मरीज जल्दी से जल्दी स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच के आपन इलाज शुरू करवा सके। लेकिन इ स्वास्थ्य केन्द्र के रहले कउनों फायदा नाहीं हव। जब मरीज  इहां जालन त मेडिकल में से जाके दवाई लेवे के पड़ला। आउर इलाज भी नाहीं हो पावत कि दूसरे जगह या फिर जिला अस्पताल में रेफर कर देहियन। जब सब काम जिला अस्पताल के करे के हव त कउन फायदा हव स्वास्थ्य केन्द्र के।
जब भी गावं के लोग मरीज के स्वास्थ्य केन्द्र में लेके जहियन त कहियन कि दवाई नाहीं हव का कि डसक्टर नाहीं हयन। स्वास्थ्य केन्द्र खाली देखे खातिर के बनल हव। कोई के सर में दर्द रही शरीर में अइठन रही त एकर इलाज स्वास्थ्य केन्द्र में ना होई। एकरे खातिर के जिला अस्पताल में रेफर कर देहियन। मेहरारून डिलीवरी खातिर के जात हईन अगर खून के कमी रही या बच्चा कमजोर रही त ओेके भी जिला अस्पताल में भेज देहियन। हर छोटी से भी छोटी दवाई के भी पइसा लगला। अगर एही हाल रही त लोग का सेच के स्वास्थ्य केन्द्र में जहियन। जब लोग के पइसा देके इलाज करवावे के रही त प्राइवेट अस्पताल में ना चल जहियन।