का बरसा, जब कृषि सुखानी

सुखान परी फसल
सुखान परी फसल

जिला बांदा। भले ही बारिश होइगे होय, पै खरीफ के फसल तौ सूख गे है। किसान शासन से सूखा घोषित होय खातिर विशाल धरना जुलूस करिन हैं। साथै नहर का पानी टेल तक पहुंचै के भी मांग करिन हंै। 2 सितम्बर का बांदा, पैलानी, अतर्रा, नरैनी अउर बबेरू तहसील दिवस मा किसानन का यहै मुद्दा छावा रहा है।
29 अगस्त 2014 का बांदा तहसील मा हजारन के संख्या मा किसान टैªक्टर मा भर-भर के आये रहैं। उनके मांग रहै कि बारिश के जइसे होइगे अब सूखा घोषित कइके किसान का मुआवजा दीन जाय। किसान भुखमरी के कगार मा है।
जौरही गांव के रामश्री, दुरेड़ी के रामसखी तिन्दवारा के राम किशोर सैमरा के भगवानदीन, पून के रामशरन समेत सैकड़न गांव के किसान विशाल धरना प्रदर्शन मा शामिल रहंै। उंई आपन ज्ञापन एस.डी.एम. के जरिया मुख्यमंत्री का भेजिन हैं। डी.एम. हरेन्द्र वीर सिंह अउर अतर्रा एस.ड़ी.एम. मनोज कुमार कहत हैं-“किसानन के ज्ञापन का मुख्यमंत्री तक भेजा जई। होंआ से ही सूखा घोषित कीन जा सकत है। जबै जबै सूखा घोषित के बात जोरन मा होत है तबै बारिश होई जात है।”

टेल तक नहीं पहुंचत नहर का पानी

जौहरपुर के किसान बतावत समस्या
जौहरपुर के किसान बतावत समस्या

जिला बांदा, ब्लाक तिन्दवारी का गांव जौहरपुर, सैमरी अउर नरैनी ब्लाक के कइयौ गांव। इं गांवन के किसान नहर का पानी टेल तक न पहुंचै अउर पम्प कैनाल के न चलैं से परेशान होइके 2 सितम्बर का तहसील मा दरखास दिहिन।
जौहरपुर के शिवसागर, उदय, जगदीश अउर रामकिशोर कहत हैं कि आषाढ़ के महीना से पम्प कैनाल बंद परा है। या मारे अलोना माइनर भी बंद परी हैं जेहिसे किसान खासकर धान के सिंचाई खातिर परेशान हंै। या समस्या अगस्त 2014 के महीना मा नहर विभाग का बताई गे है, पै कउनौ कारवाही नहीं भे आय।
नहर विभाग का जे.ई. मनोज कुमार कहत है-“पम्प कैनाल मा पानी ज्यादा भर जाय से कनेक्शन सबै जघा के काट दीन गे रहैं। अब पानी कम होइगा है तौ 3 सितम्बर 2014 से नहर चालू कई दीन गे है।
नरैनी के रामआसरे अउर सुरेन्द्र कहिन कि खरौंच माइनर मा झाल टूटै अउर अतिक्रमण के कारन पानी टेल तक नहीं पहुंचत आय।
भारतीय किसान यूनियन के नरैनी तहसील अध्यक्ष महेश्वरी दीक्षित कहिन कि उंई आपन समस्या भारतीय किसान यूनियन के जिला मुख्यालय मीटिंग मा सुनाइन हैं। होंआ से भरोसा मिला रहै कि समस्या निपटाई जई, पै समस्या जइसे का तइसे है।
केन नहर प्रखण्ड तृतीय के जे.ई. संजय साहू कहत हैं कि नहर के झाल टूटै अउर अतिक्रमण के जांच कीन जई। नहर बनवा के टेल तक पानी पहुंचावा जई।