का टंकी देखै से पियास बुझी

चित्रकूट जिला मा अगर पानी के समस्या का देखा जाये तौ पता परत हवै कि पानी खातिर मड़ई केत्ता परेशान रहत हवैं। जिला के आबादी दस लाख चैंतिस हजार चार सौ हवै। यहिमा से कइयौ लाख मड़ई पियै खातिर पानी का अबै भी तरसत हवै।
हम बात करित हन पानी के टंकी के। गांवन मा कइयौ बरस से पानी के टंकी बनी हवै। उंई टंकी इनतान लागत हवैं जइसे कि सफेद हाथी ठाढ़ होय।
इनतान के गर्मी मा पियै खातिर पानी मिलगा तौ मानौ कि सबै कुछ मिलगा। घर के हर काम मा पानी लागत हवै। पानी के समस्या सब से ज्यादा मेहरियन का झेलैं का परत हवै। मनसवा तौ आपन काम धंधा करैं निकल जात हवैं। पानी के कमी होय के कारन जानवर भी पियासे हिंया हुंवा भटकत हवैं। कत्तौ-कत्तौ तौ पियास के कारन जानवर के मउत भी होइ जात हवै।
का सरकार के जिम्मेदारी बस टंकी बनवावैं के हवै। टंकी मा पानी के सप्लाई दें के नहीं होत हवै। या फेर पानी के सप्लाई करैं खातिर विभाग वालेन से कत्तौ नहीं कहत हवै। का यहिके जिम्मेदारी विभाग वालेन के नहीं आय। यहिके खातिर सरकार का विभाग वोलन से जवाब देही लें के जरूरत हवै। अगर विभाग वालेन से पूंछा जात हवै तौ उंई तुरतै कहि देत हवैं कि टंकी मा पानी बराबर छोड़ा जात हवै। जबै तक सरकार विभाग वालेन से जवाबदेही न लेइ तबै तक यहिनतान समस्या बनी रही।