कार्तिक के माह में होती थी ख़ास महिला कबड्डी, इस प्रथा के कुछ पल हमने ढूँढ निकाले चित्रकूट में

18 अक्टूबर 2017 को प्रकाशित
जिला चित्रकूट,ब्लाक मानिकपुर,गांव अगरहुंणा। मंहगाई त्यौंहारन के रौनक छीन लिहिस हवै। पै मड़ई त्यौहारन मा ख़ुशी मनावे खातिर मौका ढूढ़ लेत हवैं। ज्यादा काम होय के बाद भी बुन्देलखण्ड के मेहरिया कार्तिक महीना मा कबड्डी खेले खातिर समय निकाल लेत हवैं। पै मेहरिया का कबड्डी खेल अब बहुतै कम देखें का मिलत हवैं। पै अगरहुंणा मा कबड्डी-कबड्डी सुने का मिला तौ पै मेहरिया के संख्या बहुतै कम रहि हवैं। का आवै वाले समय मा मेहरिया कबड्डी का या खेल भी लोक कला जइसे धूमिल होइ जई।

परगिया बताइस कि ज्यादा काम के कारन मैं कबड्डी नहीं खेल पावत आहूं। सुनीता बताइस कि मैं अपने मइके मा कबड्डी खेलत रहिहौं पै ससुराल वालें नहीं खेले देत आहीं।नवरात्री,दशहरा अउर दीपावली मा कबड्डी खेल होत हवै।कोयली अउर रुक्की देवी बताइन  कि पहिले बहुतै मेहरिया या खेल खेलत रहैं हम आपन ससुर अउर मनसवा के मना करै के बादौ चुप्पे से कबड्डी खेलित रहैं।पै अब तौ कबड्डी देख के काम चलाइत हवै।

बाईलाइन-सहोद्रा