कानूनी होने के बावजूद भी देश में होता है, 56 % असुरक्षित गर्भपात

साभार-पिक्साबे

निकिता मेहता गर्भावस्था के 24 वें सप्ताह में थी, जब एक परीक्षण में होने वाले बच्चे के दिल में काफी परेशानियों का पता चला था।  निकिता गर्भपात करना चाहती थी, लेकिन वो गर्भावस्था के मेडिकल टर्मिनेशन (एमटीपी) अधिनियम के तहत ऐसा नहीं कर पा रही थी। इस अधिवेशन के मुताबिक गर्भवती महिला के जीवन को बचाने के लिए तत्काल आवश्यक  न हो तो 20 सप्ताह से अधिक उम्र के भ्रूण का गर्भपात जुर्म है।
मेहता के वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह दलील दी, कि मेहता एक गंभीर विकलांग शिशु को जन्म नहीं देना चाहती हैं। लेकिन अदालत ने इसे यह कहते हुए मनाकर दिया कि मुद्दा अजन्मे बच्चे के भविष्य में होने वाले स्वास्थ्य से है, न कि मां से। जबकि कानून माँ के स्वास्थ्य पर गर्भपात की बात कहता है।
लोगों की मांग थी कि एमटीपी अधिनियम में संशोधन किया जाए। इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने महिला के प्रजनन विकल्प का अधिकार निजी स्वतंत्रता के रुप में देखते हुए हृदय संबंधी समस्या होने पर महिला को 20 से अधिक सप्ताह के भ्रूण को समाप्त करने की इज्जत दी है। बलात्कार के मामलों में गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति है और पैदा होने वाले बच्चे में होने वाली परेशानियों के मामले में सीमा को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव है।
भारत में आयोजित  56% गर्भपात असुरक्षित हैं, विरोधियों ने चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि गर्भपात के लिए गर्भावस्था अवधि बढ़ाने से अधिक लिंग-चयनात्मक गर्भपात हो सकता है। असुरक्षित गर्भपात अप्रशिक्षित प्रदाताओं द्वारा / या अस्वास्थ्यकारी माहौल में जोखिम भरी प्रक्रिया है। भारत में सभी मातृ मृत्युओं में से 8.5%असुरक्षित गर्भपात के कारण होता है और इस वजह से ही हर रोज 10 महिलाओं  की मौत होती है।
20 या 24 सप्ताह में सुरक्षा के आधार पर गर्भपात किया जाता है या नहीं, इसमें कोई खास अंतर नहीं है। अल्ट्रासाउंड स्कैन द्वारा 18 से 20 सप्ताह के दौरान अधिकतर भ्रूण की परेशानी पता लगाई जा सकती हैं। हालांकि,  हृदय या मस्तिष्क संबंधी परेशानी को 20 और 24 सप्ताह के बीच जान सकते हैं।
संशोधन बिल उन मामलों में सीमा बढ़ाकर 24 सप्ताह तक करने का प्रस्ताव करता है, जहां गर्भावस्था की निरंतरता में गर्भवती महिला के जीवन या उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चोट शामिल होगी। इसमें ऐसे मामले शामिल होंगे जहां गर्भपात बलात्कार के कारण या गर्भनिरोधक विफलता से होता है।  स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी के अतिरिक्त, सीएचसी स्तर पर आयुष डॉक्टरों की कमी भी है। आयुष के डॉक्टरों को गर्भपात करने की अनुमति दे तो पर्याप्त डॉक्टर हो जाएंगे।
गर्भपात बिल में अन्य परिवर्तनों का भी प्रस्ताव है, जैसे कि 12 सप्ताह से अधिक गर्भधारण के लिए दो डॉक्टरों से राय लेने की आवश्यकता नहीं है। अभी गर्भावस्था समाप्त करने के एक कारण के रुप में केवल विवाहित महिलाएं गर्भनिरोधक विफलता का हवाला दे सकती हैं। यह बिल अविवाहित महिलाओं को भी इस विकल्प दे देगा।

लेख: इंडियास्पेंड