कागजन में चढ़ के रेह गओ नियम

02-01-14 Kshetriya - Thandमहोबा जिला की प्रशासन ने गरीब ओर असहांय आदमी खा ठण्डीसे बचे के लाने हर साल के जेसे ई साल भी अलाव ओर कम्बल  की व्यवस्था करी हे। पे जा सब कहूं न कहं कागजन में सिमट के रह जात हे। हम बात करत हें महोबा जिला के कस्बन की बात जित बीस से लेके तीस हजार की आबादी हे ओते दस गरीब आदमियन खा कम्बल दये जात हे।  ऊ भी अभे केऊ जघा बांटे नईं गये हे। जोन ऊंट के मुह में जीरा के समान हे। जभे की कस्बन में सौकड़ो एसे परिवार हें। जीखे पेट भर खाना नई मिलत हे। ताजा उदाहरण-श्रीनगर कस्बा में पच्चीस हजार की आवादी में दस कम्बल आयें हे। जीसे कस्बा के ही इकबाल ने पचास आदमियन खा अपने से खरीद के कम्बल गरीबन में बांटे हे। सवाल जा उठत हे की जभे सरकार गरीबन के लाने ठण्डी से बचे के लाने लाखो रुपइया भेजत हे। तो किते जात हे? का एक गांव की आबादी दो हजार से जेके तीस हजार आवादी तक को कस्बा से। सोचे वाली बात जा हे की का दसई एसे आदमी हो हे जोन गरीब हे। आखिर सरकार का हिसाब से आंकड़ा बना के भेजत हे।