क़र्ज़ माफ़ी, किसान के लिए सुविधा या एक और परेशानी? बांदा के नरैनी में खतौनी जमा कराने में दिक्कत

जिला बांदा, ब्लाक नरैनी, गाँव गोखिया और रिसौरा हेंया के तहसील मा कर्ज माफी वाले किसानन के भीड़ देखाई देत है काहे से कर्ज से माफ़ी का किसान 1 मई आखिरी दिन बतावत है। यहै कारन बैंक अउर सोसाइटी सगले खतौनी मांगी जात हैं किसानन के समय से खतौनी बनी तौ कर्जा माफ़ न होइ तौ छोट किसान भुखमरी के कगार अउर ज्यादा पहुंच जइहैं।
रिसौरा गाँव के किसान उमाशंकर बताइस कि हम सुबेरे आठ बजे से खतौनी बनवावै बइठे हन पै कर्मचारी कहत है कि शाम के 6 बजे से पहिले खतौनी न मिली। खतौनी बनवावै खातिर कउनौ से 20 रुपिया तौ कउनौ से 15रुपिया लेत हैं।
कर्मचारी धांधली करत हैं किसानन के लगे येत्ता समय नहीं आय कि दिन-दिन भर के खतौनी बनवावै, इनतान मा तौ किसान भूखन मर जइहैं।
रामदेव संजीव कुमार अउर सुरेश त्रिपाठी का कहब है कि कर्जा माफ़ी करे खातिर बैंक अउर सोसाइटी खतौनी मांगत है। समय से खतौनी न बनी तौ हम गरीब किसान का कर्ज माफ़ न होइ। चार बज गे हैं कर्मचारी कहत है कि पांच-छह बजे तक खतौनी बनीं।
कर्मचारी के पहिचान वाले हैं उनकर खतौनीं तुरतै बन जात हैं। बाकी किसान सुबेरे 8 बजे से लाइन लगाये ठाढ़ रहत हैं। जउन नियम तीन महीना पहिले रहै वहै नियम अबै भी चलत है नई सरकार बने से कुछौ नहीं बदला आय।
खतौनी लेखपाल भानु का कहब है कि वा अकेले का काम करे एक दिन मा पांच खतौनी बनावत है। अब सवाल या उठत है कि विभाग मा कर्मचारी कम है या किसानन का परेशान करे का नवा तरीका निकाला गा हैं।

रिपोर्टर- गीता

 

04/05/2017 को प्रकाशित