कह रहे थे दो दिन, हो गए दो महीने, फिर भी भुखमरी की कगार पर बांदा के 300 गधेड़ परिवार

जिला बांदा, क़स्बा बांदा हेंया गधा से बालू ढोवे का काम लगभग 300 परिवार के मड़ई करत हैं। पै बालू के अवैध खनन मा रोक के कारन दुई महीना से इं परिवार भुखमरी के कगार मा पहुंच गे हैं।
शासन दुई दिन–दुई दिन कहिके नियाव का भरोसा दइ के बालू मजूरन का लउटा देत हैं। पै अबै भी इं बालू मजूर नियाव खातिर भटकत है अउर सरकार के खिलाफ नारा लगावत है रोजी रोटी जो दे न सके वो सरकार निकम्मी है।
मल्हू का कहब है कि हम ब्रिटिश सरकार के जमाना से बालू ढोवे का काम करत आहीं पै आज तक हमार काम कत्तौ नहीं बंद भा आय।
6 मार्च का तौ मेहरिया अउर बच्चन का पुलिस बहुतै मारिस है यहै कारन मारे डेर के हम बालू ढ़ोवे का काम काम बंद कइ दीन हन हम चाहित हन सरकार हमार जानवर लइ लें। हम कत्तौ भी भीख मांग के बाहर काम कइके आपन बच्चन के पेट पाल लेबै।
सावित्री अउर गीता का कहब है कि हमार दुई जानवर भूख के कारन मर गें है। हमार बच्चा भी भूखन मरत है अउर बीमार है। पै दवाई करावे तक का रुपिया नहीं आय। दुइ महीना से काम बंद पड़ा है हम कर्जा लइ के कउनौतान आपन खर्चा चलाइन हन। जबै से मोदी के सरकार बनी हैं तबै से बालू ढोवे का का काम बंद पड़ा हैं।
नियाव खातिर दुई महीना से अधिकारिन के चक्कर लगाइन हन पै दौउड़े-दौउड़े हमार गोड़ जले लाग है, पै भी हमार कउनौ सुनवाई नहीं होत आय।
मोहन साहू बताइस कि हमार मांग पूर न होइ तौ हम भूख हड़ताल करबै। प्रशासन के कमी के कारन हमार सुनवाई नहीं होत आय।
डी.एम.सरोज कुमार का कहब है कि एक हफ्ता के भीतर बालू मजूरन का उनकर काम दइ दीन जई। यहिके खातिर आदेश दइ दीन गा हैं।

रिपोर्टर- गीता देवी

16/05/2017 को प्रकाशित