कहूं राशन कार्ड की मांग, नई मिलत गल्ला

nahi bane rasan kardजिला महोबा, ब्लाक पनवाड़ी, गांव मसूदपुरा। ई गांव के आदमियन के पन्द्रह साल से रासन कार्ड नई बने हें। जीसे मोमबत्ती जला के रात में घर को काम ओर बच्चन की पढ़ाई होत हे। जीसे राशन कार्ड बनवांये की मांग करत हे।
सन्तोष श्रीवास कहत हे की शादी के दस साल हो गये हे। दो बच्चा हे। आज तक हमाये राशन कार्ड नईं बने हे। बताउत हें की गरीबी होंय के कारन करन हम बाहर दिल्ली मजदूरी करन जात हते, अब गांव मे रहत हे। रेखारानी कहत हे की हम बसोर जाती हे। तीन बच्चा हे हम लोगन ने केऊ दइयां राशन कार्ड बनवांये के लाने फारम भरे हते। पर नई बने हे। हम लोग मोमबत्ती जला के काम चलाउत हे। जोन अभे प्रधान बनो हे ऊसे भी कहो हे। ऊ हां कहत हतो। पता नई कभे तक बनहें। प्रधान रेखा राजपूत को आदमी लक्ष्मन कहत हे की सबके राशन कार्ड बनवाये जेहे। चाहे दिल्ली में रहत हो जा फिर गांव में, जभे राशन कार्ड बनन लगहे तो फारम भरवा के बनवा दये जेहे।
ब्लाक चरखारी, गांव सोहजना। एते के तारारानी कहत हे की हमाये पीले राशन कार्ड बने हे। जीमें दो लीटर मिट्टी को तेल कोटेदार देत हे। एसे सूखा में हमाये खांये के लाने एक-एक रोटी खा मोहताज हे। प्रकाश रानी कहत हे की कोटेदार कभऊं गल्ला दे देत हे, कभऊं नई देत हे। हम कहत हें की हर महीना पांच किलो गल्ला मिलत हे तो ऊ ऊपर से न आयें को बहाना करत हे। जभे सरकार केती से आउत हे तो हमें मिलें खा चाही। कोटेदार न देय की बात झूठ कहत हे। ऊने कहो की जित्तो गल्ला आउत हे में दस दिन कोटा खोलत हों ओर सब बांट देत हों।