कहीं गिर तो नाहीं गएल

जिला वाराणसी, ब्लाक काशी विद्यापीठ, गांव भट्ठी। जब कभी कउनों छोटा बच्चन के पानी लेवे भेजल जाला आउर तनिको देरी हो जाला तो डर लगल करला। कि कहीं बच्चा गिर तो नाहीं गएल। इ डर हव भट्ठी के दलित बस्ती के मेहरारून के।

इहां के साठ सत्तर लोग के आबादी में एक ठे हैण्डपम्प हव। ओकरे पास लगभग पांच छः साल से गड्ढा हव। जब कभी कउनों छोटा लइकी लइका पानी लेवे जालन तो डर लगल करला कि कहीं गिर ना जाये। अभई कुछ दिन पहिले पार्वती के लइका मनोज गड्ढा में गिर गएल रहल। जवने से ओकरे कान, नाक आउर आंख में मिट्टी चल गएल रहल। आउर कई ठे छोटा छोटा लइकन गिर गएल रहलन। जब इ गड्ढा के बारे में भट्ठी के प्रधान प्रभावती से पूछाएल तो ओन बतइलिन कि इ बार काम बहुत धीरा होत हव। पिछली बार काम होत रहल तो सब रास्ता बनल रहल। ओके बनवावे के कोशिश भी करल जात हव उम्मीद हव कि जल्दी बन जाई।